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Dosta ki ma aura bahana ki gay sex ka chudai - Printable Version

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Dosta ki ma aura bahana ki gay sex ka chudai - SexStories - 02-08-2015

यह कहानी एक पुरानी कहानी जो केवल पीडीऍफ़ फॉरमेट में उपलब्ध थी, को दोबारा प्रकाशित किया गया है.

कैसे हैं आप सब!

यह मेरी दूसरी कहानी है। मेरी पहली कहानी ‘एवन‘ नाम से थी जिसमें मैंने अपनी मौसी और योगिता की जमकर चुदाई की थी।
उम्मीद है आप सभी ने उसे बहुत पसंद किया होगा।

अब मैं अपनी दूसरी कहानी शुरू करता हूँ।

मेरे एक दोस्त का नाम दीपक है।
उसकी एक बड़ी बहन है जो कि बहुत खूबसूरत है और उसकी माँ भी बहुत सुन्दर दिखती है।

मेरे लंड में बहुत खुजली हो रही थी।
मैं तो बस किसी न किसी को चोदना चाहता था।


एक दिन मैं दीपक के घर गया। वह घर पर नहीं था, केवल उसकी बहन और उसकी माँ थी।

घर जाने पर उसकी बहन सोनम ने हैलो किया।
उसे किसी काम से बाहर जाना था, वह मुझसे बोली- मैं घर से बाहर जा रही हूँ और मम्मी नहा रही हैं। घर पर कोई नहीं है इसलिये तुम यहीं रुको, मैं एक घंटे में आती हूं। मम्मी कुछ माँगें तो दे देना।

ऐसा कहकर सोनम चली गई।

मैं घर के ड्राईंग हाल में बैठा था।

तभी अंदर से मम्मी की आवाज आई- सोनम, मुझे हरा वाला तौलिया दे दे।

मेरी समझ में नहीं आया कि क्या करूँ।

फिर भी मैं हिम्मत करके हरा तौलिया उनको बाथरूम में देने चला गया।
मैंने दरवाजा खटखटाया।
उन्होंने सिर्फ हाथ बढ़ाकर तौलिया ले लिया और दरवाजा बंद कर लिया।

उन्हें यह नहीं मालूम था कि सोनम नहीं है।

मेरा दिल जोरों से धड़कने लगा।
मैंने दरवाजे के छेद से अंदर झांका तो मैं मस्त हो गया।

अंदर आंटी बिल्कुल नंगी खड़ी अपना बदन पौंछ रही थी।
आंटी थोड़ी मोटी हैं लेकिन फिर भी बहुत मस्त हैं।

उन्हें नंगी देखकर मैं पागल हो रहा था।

मेरी समझ में नहीं आ रहा था कि आंटी को किस प्रकार से चोदूं।

तभी आंटी के चीखने की आवाज आई।

मैंने पूछा- क्या हुआ आंटी?

आंटी बोली- बेटा मैं फिसल गई हूँ, सोनम कहाँ है?

मैंने कहा- वो तो एक घंटे के लिये बाहर गई है और मुझे यहाँ बैठा गई।

आंटी ने कहा- बेटा दरवाजा खोलकर मुझे उठा दो। मुझसे उठा भी नहीं जा रहा है।

यह सुन कर मैंने दरवाजा खोलकर देखा तो आंटी केवल ब्रा और पैंटी में थी।

मैंने जल्दी से उनकी कमर को पकड़कर उन्हें उठाया और उनके बेडरूम में ले जाकर बैठा दिया।

मैं उनको बड़ी गौर से देख रहा था आंटी समझ गई, वो बोली- क्या देख रहे हो बेटा?

मैंने कहा- आंटी आप कितनी गोरी, चिट्टी और सुन्दर हो। आप तो सोनम की बड़ी बहन लगती हो।

यह सुनकर आंटी हंसने लगीं, वो बोली- चल बदमाश… तुझे क्या मैं इतनी अच्छी लगती हूँ?

मैंने कहा- हाँ आंटी आप तो बहुत सुन्दर हो। यदि मेरा बस चलता तो आपसे ही शादी कर लेता।

यह सुनकर आंटी खुश हो गई, फिर बोली- मुझसे तो उठा भी नहीं जा रहा है।

मैंने सोचा यह अच्छा मौका है, यदि मौका गंवा दिया तो फिर चांस नहीं मिलने वाला।

मैंने आंटी से तुरंत कहा- आंटी मैं अभी आपको चलने फिरने लायक बना दूँगा। सरसों के तेल से मसाज करूँगा तो बिल्कुल ठीक हो जाओगी।

यह सुनकर आंटी बोली- हाय, तुझे मेरी मसाज करते हुए शर्म नहीं आयेगी?

मैंने कहा- आपके लिये तो इतना कर सकता हूँ न।

फिर आंटी ने कहा- ठीक है कर दे। जब तूने इतना देख ही लिया है तो मसाज भी कर दे अपनी आंटी की।

यह सुनकर मेरी खुशी का ठिकाना नहीं रहा।

मैंने सरसों के तेल की शीशी ली और आंटी की मसाज करने लगा।

सबसे पहले मैंने उनकी पीठ पर तेल लगाया।

उनकी गोरी चिकनी पीठ पर तेल लगाते ही मेरा लौड़ा खड़ा हो गया।

मैं बडे़ प्यार से पीठ की मसाज करने लगा।
मसाज करते करते मैं अपना हाथ धीरे से उनकी कमर से पेट पर और उनके बूब्स पर भी फेरता रहा।

उन्हें भी अच्छा लग रहा था।

मैंने कहा- आंटी, आपकी सफेद ब्रा तेल से खराब हो जायेगी, इसे उतार दूँ क्या?

आंटी बोली- तू तो मुझे पूरी नंगी करके छोड़ेगा… चल उतार दे।

मैंने उनकी ब्रा खोल दी और पीठ की मालिश करते करते उनके बूब्स पर भी मसाज करने लगा।

वे कुछ नहीं बोली।

धीरे धीरे मेरे हाथ उनके चूतड़ों पर भी मसाज करने लगे।

उन्हें भी मस्ती आ रही थी और वह मेरे साथ खुलकर बात करने लगी।

मैंने उनसे पैंटी खोलने को कहा तो उन्होंने मना नहीं किया।

अब वह पूरी नंगी होकर बिस्तर पर लेट गई।

मैंने उनके पूरे शरीर पर अच्छी मसाज कर दी।

मसाज करवाने के बाद बोली- वाह यार, तू तो बड़ी अच्छी मसाज करता है। मेरे पूरे बदन में फुर्ती आ गई है।

मैं बोला- आंटी आपके लिये तो कुछ भी कर सकता हूं।

आंटी बोली- अच्छा मादरचोद… मेरी गांड भी मार सकता है क्या?

यह सुनते ही मुझे और मस्ती आ गई, मैंने कहा- आपकी गांड है ही इतनी प्यारी।

यह सुनकर हंसी और बोली- चल ठीक हैं अब ये समझ ले कि तू एक मादरचोद हरामी है और मैं तेरी रखैल हूँ। यह सोचकर मुझे चोद दे।

मैं बोला- आंटी, तुम तो चालू हो। अब तो तुमको ऐसा चोदूँगा कि तुम अपने पति से चुदवाना भूल जाओगी।

यह सुनकर आंटी फटाक से बोली- तो आजा भडु़वे, जल्दी से चोद दे मुझे।

अब तो आंटी सिर्फ मेरी हो गई थी। मैंने अपने कपड़े उतार दिये।
अब हम दोनो पूरे नंगे थे।
आंटी बिस्तर पर लेटी थी, मैं आंटी के ऊपर चढ़ा और उनके होंठों को अपने मुंह में लेकर चूसने लगा।
वह भी मेरी पीठ पर हाथ फिराते हुए पूरा साथ दे रही थी।

पांच मिनट होंठों का रस चूसने के बाद मैंने उनकी गर्दन पर, फिर उनकी ब्राउन कलर की निप्पलस को चूसने लगा।
वह मज़े से कराहने लगी।

मैं ओर जोर से चूसने लगा।

धीरे धीरे मैंने उनके पूरे शरीर पर किस किया।

अब मैंने उनकी गुलाबी चूत जिस पर एक भी बाल नहीं था, मुंह डालकर चूसना चालू किया।

वह सिसकरियाँ भरने लगी।

फिर हम दोनो 69 की पोजीशन में लेट गये, वह मेरे लंड को मुंह में लेकर चूसने लगी और उसकी चूत मेरे मुँह में थी।

पांच मिनट में वह झड़ चुकी थी।

10 मिनट बाद मैं भी झड़ गया और सारी मलाई आंटी के मुंह में डाल दी।
आंटी चटोरी की तरह उसे चाट गई।

अब मैंने स्पीड में उनके होंठों और गर्दन पर किस करना चालू कर दिया।
वह मेरे लौड़े को हाथ से दबा दबाकर फिर बड़ा करने का प्रयास कर रही थी।

उसने लौड़े को फिर से मुंह में लेकर चूसना चालू किया।
मेरा लौड़ा फिर से तन गया।

मैंने आंटी को ठीक से लिटाया और उनकी टांगें फैलाकर अपने लंड को उसकी चूत पर टिका कर धक्का दिया।

एक ही वार में लौड़ा उसकी चूत के अंदर चला गया।

मैं धीरे धीरे अंदर बाहर करने लगा।

आंटी मेरी पीठ पर अपने हाथ फिराकर चुदाई के पूरे मजे ले रही थी।

कुछ देर बाद मैंने स्पीड बढ़ा दी।

आंटी के मुंह से आहह… हह… हहह… आहह… हहह… हहह… की आवाजें तेज हो गई।

मैंने आंटी की कमर में हाथ डाला और स्पीड बढ़ाकर तेज शाट मारते हुए चोदने लगा।

आंटी की चीख निकल पड़ी- आहहहह आहहहह फाड़ डालो मेरी चूत को… आहहहह आहह।

15 मिनट बाद मैंने अपनी मलाई उसकी चूत में डाल दी।

वह इस दौरान 3 बार झड़ चुकी थी। मैं आंटी के उपर ही लेट गया।

तभी अचानक दरवाजा खुला और सोनम अंदर आ गई।

हम दोनो बूरी तरह चौंक गये।

सोनम चिल्लाई- तो मेरे पीठ पीछे तुम दोनों यह काम करते हो?

मैं बोला- नहीं सोनम, यह सिर्फ आज ही हुआ है। अब मैं कभी नहीं करूंगा।

सोनम बोली- तू चूप कर मादरचोद। मेरी माँ को चोदकर मुंहजोरी कर रहा है। मैं सबको बता दूंगी।

मैं तो डर गया।

आंटी ने कहा- सोनम, अब गलती हो गई है, हमें माफ कर दो।

सोनम बोली- एक शर्त पर माफ कर सकती हूँ।

हमने पूछा- कौन सी शर्त पर?

सोनम धीरे से मुस्कुराई और बोली- तुमको मुझे भी चोदना पड़ेगा। मैं बहुत देर से तुम्हारा यह खेल देखकर बहुत गरम हो गई हूँ।

यह सुनकर हम दोनो ही सकपका गये।

आंटी बोली- वाह सोनम, तू तो मेरी भी माँ निकली। माँ ने चूदाई अब बेटी भी उसके सामने चुदायेगी।

सोनम बोली- आप दोनो तैयार हैं या नहीं?

हम तीनों एक साथ चोदा-चोदी के लिये तैयार हो गये।

मैंने सोनम को बाहों में जकड़ा और उसके होंठों को बेदर्दी से चूसने लगा।

एक हाथ उसके कपड़ों को खोलने में लगा था।

अब वह केवल ब्रा और पैंटी में ही थी।

किस करते करते मैंने ब्रा भी खोल दी और उसकी चूचियों को मसला और चूसने लगा।

सोनम के बूब्स आंटी के आधे ही थे फिर भी बहुत मस्त थे।

मैंने उसकी पैंटी खोली और उसकी चूत में उंगली डाल दी।
वह सिसकार उठी।

सोनम को पकड़कर मैंने बिस्तर पर लिटाया और उसके मुँह में लौड़े को डाल दिया।
वह लालीपाप की तरह चूसने लगी।

इधर आंटी मेरे होंठों को चूसने लगी और उसका एक हाथ सोनम के बूब्स को दबा रहा था।

सोनम ने भी हाथ ऊपर कर आंटी के बूब्स दबाने चालू कर दिये।

फिर मैंने फुर्ती दिखाई और सोनम की टांग चौड़ी करके उसकी चूत में लंड को जोर से धक्का दिया।

वह जोर से चीख पड़ी।

आंटी बोली- मार डालेगा क्या मेरी बेटी को। वह पहली बार कर रही है, उसकी चूत बहुत टाईट है। यह सरसों को तेल लगा और धीरे धीरे प्यार से चोद उसको।

आंटी ने सरसों को तेल लेकर मेरे लंड पर चुपड़ दिया और सोनम की चूत में भी।

मैंने फिर एक शाट लगाया।
आधा लंड चूत के अंदर चला गया।

तीन-चार शाट में पूरा लंड अंदर चला गया और मैं उसको अंदर बाहर करने लगा।

सोनम को दर्द हो रहा था पर अब उसे मजा आने लगा था।

मैंने अपनी स्पीड बढ़ाई।
टाईट चूत को चोदने में मुझे बहुत मजा आ रहा था।

इस मजे को मैं शब्दों में नहीं बता सकता।

10 मिनट में 2 बार झड़ गई।
मैंने अपने स्पीड फिर तेज करी और कुछ देर में मैं झड़ने वाला था। मैंने अपना लंड उसकी चूत में से बाहर निकाला और सोनम के मुंह में दे दिया और सारी मलाई सोनम के मुंह में डाल दी।

सोनम सारी मलाई चाट गई। कुछ देर हम तीनो आपस में चिपक कर पड़े रहे।

सोनम ने बताया कि उसने पहले एक बार ककड़ी को चूत में डाला था तब उसने ककड़ी को थोड़ा जोर से अंदर धक्का दिया था तो ब्लड भी निकला था।
उसके बाद मैं कुछ भी करने से डरती थी और डर के मारे किसी को नहीं बताया पर आज तुम दोनों को सेक्स करते देखा तो मैं बेकाबू हो गई।

इसके बाद हम तीनों एक साथ नहाने चले गये।

नहाते हुए मैंने आंटी और सोनम से बोला- अभी तो तुम दोनों की गांड में भी लंड डालना है।

आंटी बोली- अभी दीपक आता ही होगा। हम तुझे फिर कभी फोन करके बुला लेंगे। तब जी भरकर हमारी गांड मार लेना।
नहाने के बाद मैं वापस अपने घर चला गया और उनकी गांड मारने के ख्यालों में खो गया।
दोस्तो, आपको यह कहानी कैसी लगी?