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An upper-class family incest fuck story
#1
“मैं सजल को शुभ रात्रि कह कर आती हूँ”, कोमल ने एक बेहद ही झीना सा गाउन पहनते हुए अपने पति से कहा। उस कपड़े में उसके विशाल, गठीले मम्मे छुप नहीं पा रहे थे। उसकी चूत को आराम से देखा जा सकता था।

सुनील बिस्तर पर टेक लगाकर लेट गया। वो अपनी सुंदर बीवी को चोदने को बेचैन था। उसका अलमस्त लंड उसकी खूबसूरत बीवी की चुदाई के लिये ऊपर की ओर तैनात था। “वो कोई बच्चा नहीं है, कोमल, वो बांका जवान है और अभी कॉलेज से एक साल की पढ़ाई करके आया है। उसे इस तरह के दुलार की ज़रूरत नहीं है।”

कोमल बिना कुछ बोले दरवाज़ा खोलकर सैंडल खटखटाती बाहर चली गयी। वो बहस करने के मूड में नहीं थी।

उसने सजल के कमरे का दरवाज़ा धीरे से खोलकर पूछा, “क्या तुम अभी तक जाग रहे हो?”

कपड़ों की आवाज़ के बाद उसके लड़के ने बोला, “हाँ मम्मी, आओ अंदर।”

“क्या तुमने ठीक से खाना खाया?” कोमल ने सजल के बिस्तर पर बैठते हुए पूछा। सजल ने लिहाफ से अपना निचला हिस्सा ढका हुआ था पर उसका ऊपरी हिस्सा नंगा था।

“तुम तो जानती हो मम्मी, तुम्हारे हाथ का खाना मुझे कितना पसंद है।” उस सुंदर गठीले जवान ने उत्तर दिया। उसकी आँखें बरबस ही कोमल के गाउन पर ठहर गयीं जिसमें से कि उसकी गोलाइयों को देखा तो नहीं पर महसूस ज़रूर किया जा सकता था।

कोमल ने उसके चौड़े सीने पर हाथ सहलाते हुए कहा, “क्या मसल्स हैं, लगता है कि खूब व्यायाम करते हो।”

“हाँ मम्मी, पर इतना कुछ करने के बाद जब मैं बिस्तर पर लेटता हूँ तो बस सीधे सो जाता हूँ।”

“यह भी तुम्हारे लिये बड़ा लंबा दिन था, अब तुम सो ही जाओ। मैं चाहती हूँ कि तुम सुबह मेरे लिये तरो-ताज़ा उठो, तुम सिर्फ़ दो ही दिन के लिये तो आये हो।”

“पर अभी मैं गर्मी की दो महीनों की छुट्टी में फ़िर आऊँगा।” सजल ने अपनी साँस रोकते हुए कहा, उसे अपनी मम्मी के गर्म उरोज अपनी छाती पर महसूस हो रहे थे। उस झीने गाउन से कुछ भी रुक नहीं रहा था।

“मैं तुम्हें घर में आया हुआ देखकर बहुत खुश हूँ”, कोमल ने अपने लड़के को और जोर से भींचकर कहा। इससे उसके अपने शरीर में भी एक गर्मी सी दौड़ गयी। यह उस गर्मी से फ़र्क थी जो उसे पहले महसूस होती थी। इसमें मात्रत्व नहीं था। उसके मम्मे सख्त हो गए और उसकी चूत में एक खुदबुदी सी हुई। वह जब सजल से अलग हुई तो थोड़ी पस्त सी थी।

“मैं तुम्हें सुबह मिलुँगी।” उसने कांपते हुए स्वर में कहा और बिस्तर से उठ खड़ी हुई। उसने सजल का खड़ा हुआ लंड उसके लिहाफ़ में तम्बू बनाते हुए देखा। उसने फ़ौरन समझ लिया कि जब वह आई थी तब सजल मुट्ठ मार रहा था।

“शुभरात्रि मम्मी,” सजल ने प्यार से कहा। कोमल को ऐसा महसूस हुआ जैसे वो कुछ ज्यादा ही मुस्कराया था। उसे कभी कभी यह लगता था कि उसका लड़का उतना सीधा नहीं था जितना कि वो उसे समझती थी। सजल उससे हमेशा अपनी बात मनवा लिया करता था।

कोमल जब अपने कमरे में पहुँची तब भी अपने मन से वह उन भावनाओं को नहीं दूर कर पायी। इससे उसे डर और रोमाँच दोनों हुए। उसे पहले भी कभी-कभी सजल के लिये ऐसी भावनायें आयीं थीं पर आज जितनी तेज़ नहीं। उसे ग्लानि होने लगी, पर कुछ-कुछ रोमाँच भी।

“अपने बच्चे को अच्छे से सुला दिया?”, सुनील ने व्यंग्य भरे शब्दों में पूछा। उसने अपना तना हुआ लंड अपने हाथ में लिया हुआ था और उसे धीरे-धीरे सहलाते हुए व्हिस्की पी रहा था।

“ज्यादा मत बोलो!” कोमल ने कुछ ज्यादा ही गुस्से से जवाब दिया। उसने सुनील का बड़ा लंड देखा तो उसके मन में चुदाई की तीव्र इच्छा हुई, पहले से कहीं ज्यादा ही तीव्र। पर वह अपनी कामुकता को दिखाना नहीं चाहती थी। कोमल ने भी एक ग्लास में तगड़ा डबल पैग बनाया और नीट ही पीने लगी। उसे नशे में चुदाई का ज़्यादा आनंद आता था।

“ठीक है, लड़ो मत,” सुनील बोला। “मेरे ख्याल से आज मैं तुम्हे सेवा का मौका देता हूँ। क्या तुम मेरे लंड को चूसने से शुरूआत करना पसंद करोगी?”

“बड़े होशियार बन रहे हो।” कोमल भुनभुनाई। पर वो भी मन ही मन उस कड़कड़ाते हुए लंड का रसास्वादन करना चाह रही थी। उसका गाउन एक ही झटके में ज़मीन पर जा गिरा और केवल ऊँची हील के सैंडल पहने वो धीमे से बिस्तर की ओर कदम बढ़ाने लगी। इससे उसके पति को उसकी सुनहरी नंगी काया का पूरा नज़ारा हो रहा था। सुनील का पूर्व-प्रतिष्ठित लंड कोमल की जघन्य काया को देखकर और टन्ना गया। उसकी मनोरम काया पर उसके काले निप्पल जबर्दस्त एफ़ेक्ट पैदा कर रहे थे। सुनील की नज़र फ़िर अपनी पत्नी के निचले भाग पर जा टिकी, जहाँ चिकना और सुनहरी स्वर्ग का द्वार चमचमा रहा था।

“तुम चालीस साल की होने के बावज़ूद भी बहुत हसीन हो।” सुनील ने मज़ाक किया। कोमल की जांघें परफ़ेक्ट थीं, न पतली न मोटी।

“तारीफ़ के लिये शुक्रिया।” कोमल थोड़े गुस्से से बोली। उसने एक गोल चक्कर घूमा जिससे सुनील को उसके पृष्ठ भाग का भी नज़ारा हो गया। उसका यही हिस्सा सुनील को सर्वाधिक प्रिय था, उसे देखते ही वो पागल हो जाता था।

“इधर आओ जानेमन।” वो लड़खड़ाती हुई आवाज़ में बोला। जब कोमल बिस्तर पर पहुँची तो सुनील ने उसे अपने ऊपर खींच लिया। वह काफ़ी उत्तेजित था। कोमल को भी यही पसंद था।

“हाँ, आज रात मुझे कुचल दो, जानेजाँ।” वो अपने जिस्म को सुनील के शरीर से दबवाते हुए बोली और जब सुनील ने उसके निप्पल काटे तो वो सनसना गयी। उसे सुनील से एक ही शिकायत थी, वो बहुत प्यार से पेश आता था, जबकी कोमल को जोर ज्यादा भाता था। उसे घनघोर चुदाई पसंद थी।

“और जोर से काटो,” वो बोली। जब सुनील ने उसके चूतड़ पकड़ कर दबाए तो वो बोली, “मेरी चूचियों को और जोर से चूसो।”

कोमल आनंद से पागल हो गयी थी पर उसके पति ने उसे वहशी तरीके से प्यार करना बंद किया और उसका सर अपने लंड को चूसने के लिये नीचे किया।

“मेरा लंड चूसो।” वो बोला।

“अभी नहीं सुनील, मेरे मम्मों को थोड़ा और चूसो। उन्हे और काटो। तुम जब ऐसा करते हो तो मुझे बहुत मज़ा आता है।”

“मैं और इंतज़ार नहीं कर सकता। मैं बहुत उत्तेजित हूँ, मेरा लंड चूसो।” सुनील ने सिर्फ़ अपने आनंद का ख्याल करते हुए कहा।

“नहीं!” कोमल चींखी, “हम हमेशा ऐसा ही करते हैं। तुम इस मामले में बहुत खराब हो। तुम जानते हो कि मुझे क्या भाता है, फ़िर भी तुम सिर्फ़ वही करते हो जिसमें तुम्हे खुशी मिलती है। मुझे अपनी खुशी के लिये तुम्हारी मिन्नतें करनी पड़ती हैं।”

“देखो जानेमन, हम इस बारे में कई बार बहस कर चुके हैं। मुझे जबर्दस्ती अच्छी नहीं लगती, कभी-कभी जैसे कि आज, मैं बहुत उत्तेजित हो गया था और मैने तुम्हे पकड़ लिया। अब क्या तुम बेवकूफ़ी बंद करोगी और बचपना छोड़ मेरा लंड चूसोगी?”

“नहीं, मैं मूड में नहीं हूँ।” कोमल गुस्से से बोली और बिस्तर की चौखट पर बैठ गयी।

“तुम किसे मूर्ख बना रही हो प्रिय? मैं जानता हूँ तुम हमेशा चुदाई के लिये तैयार रहती हो... और तुम भी ये जानती हो।” सुनील ने उसे वापस खींचते हुए कहा।

“तुम बहुत बद्तमीज़ हो।”

सुनील ने उसे वापस अपने लंड पर जोर देकर झुका दिया। इस जबर्दस्ती से कोमल फ़िर से रोमाँचित हो उठी। सुनील गुरार्या, “बकवास बंद करो और मेरा लंड चूसो।”

“ओह” कोमल की चूत में एक गर्मी सी फ़ैल गयी। उसने लंड चूसने से मना कर दिया। वो सुनील से और जोर की चाह रखती थी।

“हरामज़ादी, मैने कहा मेरा लंड चूस!” सुनील चिल्लाया और वो कोमल के मुँह में अपना लंड भरने की कोशिश करने लगा।
कोमल के दिमाग में एक बात आई। इस समय उसका पति वासना से पागल था, उसने सुनील से उसका लंड चूसने से पहले एक वादा लेने की ठानी।

“ठीक है, पर अगर तुम वादा करो कि सजल को अगले साल यहीं रखकर पढ़ाओगे।”

“क्या? इस समय इस बात का क्या मतलब है?”

“क्योंकि तुम सिर्फ़ इसी समय मेरी सुनते हो। मुझे उसका वह कॉलेज बिलकुल पसंद नहीं है। उसे हमारे साथ यहीं रहना चाहिये।”

“हम यह सब बातें पहले भी कर चुके हैं। उस कॉलेज में उसकी ज़िन्दगी बन जायेगी।” सुनील गुस्से और उन्माद से बोला। “उसे वहीं पढ़ने दो।”

“नहीं, उसे यहीं रखो।” कोमल ने सुनील के दमदार लंड के सुपाड़े का एक चुम्मा लेते हुए कहा। “ठीक है?”

“ऊँह, ठीक है। आह”, सुनील के मुँह से चीख सी निकली जब कोमल ने उसका मोटा लंड एक ही बार में अपने गर्म मुँह मे ले लिया।

अब जब बहस की कोई गुंजाइश नहीं रही, कोमल अपने मनपसंद काम ’लंड चुसाई’ में तन मन से व्यस्त हो गयी।

“अपनी जीभ भी चलाओ, जान।”

“मेरे मुँह को चोदो सुनील।” उसे लौड़े का अंदर बाहर का घर्षण बहुत प्रिय था। उसके मनपसंद आसन में सुनील उसके मुँह को चोदता था जब वह उसके आगे झुकी रहती थी।

“वाह मेरी लौड़ाचूस, और जोर से चूस।” सुनील अपने मोटे लंड को अपनी बीवी के सुंदर मुँह में भरा हुआ देखकर ज्यादा देर तक ठहरने वाला नहीं था। वह उसके हसीन मुँह में ही झड़ना चाहता था।

कोमल ने अपना मुँह सुनील के लंड से हटा लिया। “तुमने ऐसा क्यों किया?” सुनील कंपकंपाते हुए बोला। उसने कोमल का सर फ़िर से अपने लंड पर लगाना चाहा।

“अभी मत झड़ना सुनील। तुम बहुत जल्दी झड़ जाते हो। मैं प्यासी ही रह जाती हूँ। इस बार तुम मुझे झड़ाये बिना नहीं झड़ोगे” कोमल बोली। “तुम मेरी चूत चूसो, मैं तुम्हारा लंड चूसती हूँ।”

सुनील ने कोमल के चूतड़ अपनी ओर खींचे, और जोरदार तरीके से कोमल की चुसाई करने लगा। जब उसने अपने दाँतों से चूत के दाने को काटा तो कोमल आनंद से चिहुंक पड़ी।

“तुम हर बार ऐसा क्यों नहीं करते? जब तुम काटते हो तो कितना मज़ा आता है। हाँ मेरी चूत को ऐसे ही चूसो”

“तुम मेरा लंड अच्छे से चूसो और मैं वही करूंगा जो तुम चाहोगी।” सुनील के चेहरे पर कोमल की चूत का रस चिपका हुआ था। उसे जबरन थोड़ा रस पीना पड़ा। उसे इस रस का स्वाद अच्छा भी लगा।

“हाँ, मेरी जान! आज हम रात भर एक दूसरे का रस पियेंगे।” कोमल खुशी से चीखी। उसने अपने पति के टट्टों पर अपनी ज़ुबान फ़ेरी। उसने पक्का किया हुआ था कि सुनील से चूत चुसवा कर ही रहेगी। उसके बाद वो उसे चोदने देगी जब तक कि दोनों थक न जायें पर कोमल ने चूसना शुरू नहीं किया। वो सोच रही थी की सजल का लंड कैसा दिखता होगा। क्या उसका लंड भी सुनील जितना बड़ा होगा? सुनील का लंड नौ इंच लंबा था और बहुत मोटा। उसने अपने हाथ में मौजूद हथियार को देखा और सोचा काश यह सजल का होता।

जब सुनील ने उसकी चूत को जोर से चूसना शुरू किया तो उसे महसूस हुआ जैसे वो फ़ट जायेगी। अपने बेटे के ख्याल ने यह निश्चित कर दिया कि इस बार वो लंबी झड़ेगी। “ओह सुनील, मैं झड़ रही हूँ, मुझे खूब चोदा करो, मुझे इसकी सख्त ज़रूरत रहती है। मुझे तुम्हारे मुँह और लंड की हमेशा प्यास रहती है। इतनी जितना तुम मुझे नहीं देते।”

सुनील जानता था कि कोमल उसे तब तक नहीं चूसेगी जब तक वो उसकी इच्छा पूरी नहीं कर देता। उसकी उंगलियों ने कोमल की गाँड को फ़ैलाया और उंगली हल्के से उस बादामी छेद पर छुआई।

“एक बार और!” कोमल ने मिन्नत की। उसने सुनील का लंड इतनी जोर से दबाया कि उसकी चीख निकल गयी। वो तो उसी समय उस स्वादिष्ट माँसपिंड को खा जाती अगर उसे उसकी ज़रूरत अपने किसी दूसरे छेद में नहीं होती। वो शानदार ऊँचाई पर पहुँच कर झड़ गयी।

“अब तुम्हे मुझे इंतज़ार कराने का फ़ल भुगतना होगा।” सुनील बोला जब वो शाँत हुई। उसने कोमल को उठाकर चौपाया बनाया और अपना पूरा लंड एक ही बार में उसकी लपलपाती हुई चूत में पेल दिया।

“हाय!”, कोमल के मुँह से आनंद भरी सीतकार निकल गयी और वो उस धक्के से आगे जा गिरी।

“हे भगवान तुम बहुत गर्म हो।” सुनील हाँफ़ते हुए बोला। कोमल की भट्टी उसके लंड को एक धौंकनी की तरह भस्म किये दे रही थी। “ले मेरा लौड़ा और बता कैसा लगता है, चुदास औरत!”

“मुझे पूरा चाहिये, पूरा!” कोमल ने ज़वाब दिया। अगर उसका पति यह समझता था कि वो जीत जायेगा तो वो गलत था। वो जितना भी दे सकता था कोमल उससे ज्यादा लेने के औकात रखती थी। वो जितना जोर लगाता कोमल को उतना ही ज्यादा मज़ा आता। वो उससे जितनी बुरी तरह से बोलता, उतनी ही उसकी वासना में वृद्धि होती। उसने अपनी प्यासी चूत से सुनील का मोटा लंड जकड़ लिया और उम्मीद करने लगी की वह इसी वहशियाने तरीके से उसे चोदता रहेगा। सुनील को भी अपनी पत्नी को इस तरह से चोदने में मज़ा आ रहा था, इसलिये उसने अपना स्खलन रोक रखा था। उसने कोमल की चमकती कमर का नंगा नाच देखा और उसके पुट्ठे जोर से भींच डाले।

जब उसके दिमाग में सजल का ख्याल आया तो कोमल ने कुछ और सोचने की कोशिश की पर वो अपने बेटे को अपने दिमाग से निकालने में सफ़ल नहीं हुई। सजल की नंगी छाती की चमक उसके दिमाग में रह-रह कर कौंधने लगी। हालांकि उसने सजल का लंड सालों से नहीं देखा था पर अब उसे वह अपनी आँखों के आगे देख रही थी।

“हाँ, और अंदर!” उसने आह भरी। फ़िर उसने महसूस किया कि ये उसने सुनील नहीं बल्कि सजल से कहा था! उसने सोचा था कि यह सजल का मोटा लंड था जो उसे चोद रहा था। उसकी कल्पना में सजल का लंड दस इंच लंबा और बहुत मोटा था।

सुनील के स्वाभिमान को कोमल की कही हुई कुछ बातों से बहुत चोट पहुँची थी। “तो मैं हमेशा तुम्हे झाड़े बिना ही झड़ जाता हूँ?” वो तमतमा कर बोला। “तुम्हे यह दिखाने के लिये कि तुम कितनी गलत मैं तुम्हे एक बार से ज्यादा बार खुश करके ही झड़ुँगा।”

“हाँ, ये हुई न बात!” कोमल बोली, “तुम्हारे हाथ मेरे मम्मों को किस तरह निचोड़ रहे हैं... हाँ सुनील मुझे जोर से चोदो।”

कोमल झड़ गयी। “चोदो मेरी चूत को!” वो चिल्लाई। उसे पता था कि अगर सजल जागता होगा तो वो सुन लेगा। इससे उसे और अधिक गर्मी आई और उसकी चूत के स्पंदन और तेज़ हो गए। “और!” वो चीखी। उसे सुनील के हाथ अपनी छाती पर आग की तरह महसूस हो रहे थे। “और, मैं फ़िर झड़ रही हूँ मुझमें यह पूरा लंड पेल दो जानेमन!”

आज सुनील को अपने अभी तक न झड़ने पर यकीन नहीं हो रहा था। कोमल की बेहद गर्म और टाइट चूत उसके लौड़े को कसकर जकड़े हुए थी पर वह अभी तक झड़ा नहीं था!

“अब!” वो बोला जब उसकी पत्नी ने झड़ना बंद किया। वो कोमल की सुलगती चूत से अपना लंड निकलना तो नहीं चाहता था पर वो एक दूसरे तरीके से झड़ना चाह रहा था। वो झड़ते समय कोमल का चेहरा देखना चाहता था और उसके हसीन चेहरे पर ही अपने प्यार का प्रसाद चढ़ाना चाहता था।

“अब तुम मुझे ऊपर आकर चोदो।” कोमल बोली तो उसके पति ने उसे कमर के बल बिस्तर पर पलट दिया। हालांकि वो अभी अभी ही स्खलित हुई थी पर यह भी जानती थी की दो चार धक्के और पड़ने पर वो एक बार फ़िर नदी पार कर लेगी। पर सुनील उसके पेट पर आ बैठा। “अब मैं तुम्हें और नहीं चोद रहा, मैं तुम्हारे मुँह में आना चाहता हूँ” और वह अपने लंड का मैथुन करने लगा।

“नहीं सुनील, ऐसा मत करो... मुझे थोड़ा और चोदो।” उसे यह बिलकुल पसंद नहीं आ रहा था कि सुनील अकेले ही झड़ना चाह रहा था।

“अपनी चूत से खेल लो अगर तुम्हें और आना है।” सुनील उसकी भावनाओं को नज़र-अंदाज़ करते हुए बोला। हालांकि उसकी चूत अभी और प्यासी थी पर समय की ज़रूरत समझते हुए कोमल ने इसका ही आनंद उठाने का निश्चय किया। “ऊह”, उसने गहरी साँस लेते हुए अपनी चूत में अपनी दो उंगलियाँ घुसेड़ दीं।

“ये ले!” सुनील चिल्लाया और अपना गर्मागर्म रस की पिचकारी कोमल के चेहरे पर मारने लगा। कोमल ने उस फ़ुहार को अपनी तरफ़ आते हुए देखा। पहले उसके माथे, फ़िर नाक पर और अंत में वो स्वादिष्ट रस उसके मुँह में आ गिरा। “थोड़ा और” उसने चटखारे लेते हुए कहा। जब बाकी का रस उसकी छातियों पर गिरा तो उसने एक हाथ से उसे उठाकर चाटा और वहीं अपनी छातियों पर मल दिया और दूसरे से अपनी चूत से खिलवाड़ जारी रखा। वह एक बार फ़िर सुख की कगार पर थी।

“मुझे अपने रस से सरोबार कर दो, मेरे मुँह मे आओ, मेरे मम्मों पर आओ। आओ! मैं आ रही हूँ, अपने टट्टों को मेरे ऊपर खाली कर दो। मेरे पूरे शरीर को नहला दो!” जितना वो चाट सकी उसने चाट लिया बाकी उसने अपने जिस्म पर मल लिया।

कोमल इसी हालत में और घंटों रह सकती थी। उसे अपने पति का भारी शरीर अपने ऊपर बहुत अच्छा लगता था पर सुनील उसके ऊपर से हटते हुए बोला “तुम उठ कर क्यों नहीं नहा कर अपने को साफ़ कर लेतीं?”

“नहीं, बस तुम मुझे लिहाफ़ उढ़ा कर ऐसे ही छोड दो। मुझमें अब कुछ भी करने की ताकत नहीं है।” उसने बहाना बनाया। वो इसी तरह रहना चाहती थी। उसने अपने चमकते स्तनों को देखा और सोचा कि उसे कैसा लगता अगर यह वीर्य-रस सजल का होता?

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अध्याय - २
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“मुझे नहीं लगता कि तुम्हारा अकेले गाड़ी लेकर घर जाना ठीक है।” सुनील अपना सामान बाँधते हुए बोला।

कोमल उसे कुछ शट्‌र्स देती हुई बोली, “अगर तुम काम के लिये पूरे देश में हवाई-सफ़र कर सकते हो तो मैं क्या सजल को स्कूल छोड़ने दो सौ किलोमीटर गाड़ी नहीं चला सकती?”

“अगर मैं आज फ़ोन न उठाता तो मुझे जाना न पड़ता। बॉस कुछ सुनने को राज़ी ही नहीं था कि मुझे सजल को उसके स्कूल छोड़ने जाना है।”

“तुम चिन्ता मत करो, सुनील। मेरे साथ सजल होगा और उसे छोड़ कर मैं बिना रुके सीधे घर ही आऊँगी। मैं किसी अजनबी से बात नहीं करुँगी और न ही उनसे कोई मिठाई ही लुँगी” कोमल हँसते हुए बोली।

सुनील ने अपना सूटकेस बंद किया और अपना ब्रीफ़केस उठाया। “नहीं तो मैं सजल को अपने साथ एअरपोर्ट ले जाता हूँ, वहीं से मैं उसे स्कूल के लिये बस में बिठा दुँगा।”

“बेकार की बात मत करो। न सिर्फ़ यह मंहगा पड़ेगा बल्कि सजल को भी इससे दिक्कत ही होगी। मेरा उसे छोड़ने जाना ही सबसे अच्छा उपाय है” कोमल ने कहा।

“नहीं तो तुम सजल को छोड़ कर किसी होटल में रात के लिये रुक जाना और सुबह वापस आ जाना।” सुनील जानता था कि रात के डिनर के बाद कोमल शराब के एक-दो पैग पीये बिना नहीं रह सकती और वो नहीं चाहता था कि ड्रिंक कर के कोमल हाईवे पर कार चलाये। पहले भी कोमल कई बार सुनील की चेतावनी के बावजूद नशे की हालत में कार ड्राइव किये बिना नहीं मानती थी और एक-दो बार हल्का एक्सीडेंट भी कर चुकी थी। इस समय अगर सुनील ये मुद्दा उठाता तो उसे पता था कोमल कलेश करेगी। इसलिए उसने कोमल को अप्रत्यक्ष रूप से होटल में ठहरने की सलाह दी।

कोमल को यह बात ठीक लगी। “ठीक है, मैं भी रात के लिये कुछ सामान ले लेती हूँ। तुम्हारी टैक्सी आ गयी है। तुम निकलो।”

“ध्यान रखना कोमल। मैं तुमसे गुरुवार को मिलुँगा।”

कोमल बाहर जाने के ख्याल से बेहद खुश थी, चाहे एक रात के ही लिये सही और उसे सजल के साथ भी कुछ समय ज्यादा मिलेगा। इस बार वो उससे ठीक से मिल ही न पायी थी।

“सजल!”, उसने अपने बेटे को आवाज़ दी। “अब नहाना बंद करो और तैयार हो जा...। और ध्यान रहे कि तुम अपनी सारी ज़रूरत की चीज़ें लेना मत भूलना।”

जब वो सजल का इंतज़ार कर रही थी तब उसने अपना बैग भी तैयार कर लिया। पहले उसने एक ही रात के लिये सामान लिया था फ़िर मन बदल कर कुछ और चीज़ें भी रख लीं। वो कुछ दिन घर से दूर रहना चाहती थी। वो उस होटल में एक की जगह दो दिन रुक जायेगी। वहाँ एक तरणताल था और वो दो-तीन सैक्सी उपन्यास पढ़ने के लिये ले लेगी। उसने अपनी बिकिनी भी ले ली। जब तक उसका सामान पैक हुआ उसने एक अतिरिक्त दिन रुकने का मन बना लिया था।

“मम्मी, क्या मैं आपका हैयर ड्रायर इस्तेमाल कर सकता हूँ?” सजल ने पूछा।

कोमल ने जब पलट कर देखा तो सजल सिर्फ़ तौलिया पहने हुए खड़ा था। उसने सोचा अगर सजल का तौलिया खुल गया तो क्या होगा?

“वो ड्रैसर में है।” उसने कांपती हुई आवाज़ में कहा। उसने सजल को ड्रायर लेकर कमरे से जाते हुए देखा। उसकी आँखें उसके बलिष्ठ शरीर का आंकलन कर रही थीं।

“तुम्हें इस तरह सोचना बंद करना होगा, कोमल।” उसने स्वयं से कहा। वो अपने पुत्र की चाह से ग्रसित थी। उसने अपने होटल में रुकने के असली कारणों के बारे में सोचा। क्या वो सजल के साथ अकेली रहना चाहती थी? उसने सजल का इंतज़ार करते हुए सोचा कि वह सजल को कहेगी कि वो भी सीधे स्कूल जाने की बजाय रात को उसके साथ ही होटल में रुक जाये। फ़िर क्या होगा?

* * * *

कोमल को सजल के साथ कार चलाने में बहुत आनंद आया। उन्होंने काफी बातें कीं जो शायद बहुत दिनों से नहीं की थीं। उसने सजल से उसके दोस्तों के बारे में जाना कि वो सब कॉलेज में क्या करते थे। वह उसके साथ बहुत हँसी और अपने आपको उसके और करीब होता हुआ पाया।

जब कॉलेज पास आने लगा तो उसने सजल से पूछा, “अगर तुम चाहो तो मेरे साथ होटल में रुक कर सुबह जा सकते हो। मैं तुम्हें पहली क्लास के पहले पहुँचा दुँगी।”

“शायद आप यह भूल रही हैं कि मुझे आज रात आठ बजे के पहले होस्टल में हाज़िरी देनी है” सजल बोला।

“हाँ, यह तो मैं भूल ही गयी थी। क्या बेकार का कानून है। मैं तुम्हारे इतने पास रहकर भी होटल में रहुँगी।”

“हाँ, पर मुझे उनका पालन करना होता है” सजल ने जवाब दिया।

“मैं उम्मीद कर रही हूँ कि तुम्हें मैं अगले साल अपने ही शहर के कॉलेज में दाखिला दिलवा पाऊँगी” कोमल ने सजल की जांघों पर हाथ रखते हुए कहा।

“पापा कभी नहीं मानेंगे... मैं घर पर ही रह कर पढ़ना चाहता हूँ पर उन्होंने जिद पकड़ी हुई है...। शायद तुम जो कह रही हो, हो न पायेगा।”

“वो तुम मुझ पर छोड़ दो” उसने सजल की जांघ को दबाते हुए कहा। “कुछ दूर पर ही उसका लंड भी है”, उसने सोचा।

“कोमल जी!” जैसे ही वो कॉलेज में दाखिल हुई कर्नल मान ने उसे पुकारा। वो उस ऊँचे लम्बे आदमी के मुखातिब हुई। “मुझे खुशी है कि आप सजल को समय रहते ले आईं। उसका व्यवहार बहुत ही अच्छा है। वो बहुत अच्छा मिलिटरी अफ़सर बनेगा।”

कोमल ने मुस्करा कर मान को देखा। वो उसे बहुत पसंद नहीं करती थी। वह उसके हिसाब से कुछ ज्यादा ही कड़क था। अगर वो इस अकड़ को छोड़ सके और जीवन का आनंद लेने को तैयार हो तो वो जरूर एक शक्तिशाली चुदक्कड़ बन सकता था।

“धन्यवाद, कर्नल मान। मैं और मेरे पति सजल पर गर्व करते हैं।”

“अपना ध्यान रखना प्रिय, मैं कल जाने के पहले तुम्हें फ़ोन करुँगी या मैं एक और रात रुक जाऊँगी । अगर मैं रुकी तो मैं तुम्हे कल दोपहर लेने आऊँगी। हम कोई पिक्चर देखेंगे और रात का भोजन साथ करेंगे” कोमल ने प्यार से कहा।

“मैं आपसे जल्दी ही मिलने की उम्मीद रखता हूँ” कर्नल ने कहा।

“धन्यवाद, कर्नल।” वो मन ही मन मुस्करायी क्योंकि उसने कर्नल की आँखों में वासना की भूख महसूस की।

कोमल के होटल का कमरा काफी बड़ा और आरामदेह था। उसने सामान खोला और थोड़ी देर लेट गयी। उसने पेपर देखा और एक अच्छा रेस्तरां ढूँढ निकाला। खाना खाकर वो होटल वापस आ गयी पर कमरे में जाने की बजाय वो तरणताल की ओर बढ़ गयी। कुछ अतिथि तैरने का आनंद उठा रहे थे। उसने वहीं बैठकर लोगों को तैरते हुए देखने का निश्चय किया।

“हेलो” उसकी ही उम्र के एक बेहद आकर्षक आदमी ने ताल के अंदर से उसे संबोधित किया। “क्या आप तैरेंगी नहीं?”

“नहीं, धन्यवाद, मैं कल तक इंतज़ार करुँगी, अभी बहुत ठंडक है।”

वह अजनबी ताल के किनारे निकल कर आ बैठा। कोमल को वह पसंद आ गया। वो काफी कद्दावर था और सीने पर घने बाल थे। उसका लंड भी उसके कच्छे से उदीप्त हो रहा था।

“क्या आप होटल में ही रुकी हैं?” उसने पूछा।

“हाँ, और आप?” कोमल आगे की संभावनाओं पर विचार कर रही थी। उसने कभी सुनील के साथ धोखा नहीं किया था। पर अब वो घर से दूर अकेली थी, वो किसी के साथ भी चुदाई का सुख ले सकती थी, किसी को पता नहीं लगने वाला था।

“मैं कल तक यहीं हूँ, मेरा नाम प्रेम है। माफ़ करिये मेरा हाथ गीला है।” उसने कोमल की तरफ़ अपना हाथ बढ़ाते हुए कहा।

“मैं कोमल हूँ। क्या आप शहर में व्यवसाय हेतु आये हैं?” उसे अपनी आवाज़ में एक कम्पन महसूस हुआ। उसने रेस्तरां में शराब पी थी उसके कारण वो काफी चुदासी हो उठी थी।

प्रेम ने उसे बताया कि वो एक सेल्समैन था और अपने कार्य के लिये यहाँ आया था। उन्होंने कुछ देर बातें कीं और एक दूसरे के अच्छे दोस्त बन गए। कोमल ने प्रेम को अपने मन की आँखों से उसे निर्वस्त्र करता हुआ महसूस किया। कुछ ही देर में उसकी प्यासी चूत दनादन पानी छोड़ने लगी। प्रेम ने कहा कि उसके कमरे में शराब की एक बोतल रखी है जो वह उसके साथ बाँटना चाहता है। कोमल ने हामी भरी और वो अंदर चले गये। जितनी शराब उसने पी थी उसके बाद उसे और शराब की ज़रूरत नहीं थी। पहले से ही हल्के नशे के कारण वो ऊँची हील के सैंडलों में थोड़ी सी लड़खड़ा रही थी, पर वो यह जानती थी कि प्रेम का यह सुझाव उसे अपने कमरे में बुलाने का एक बहाना था। उसने अभी यह निश्चित नहीं किया था कि वो प्रेम से चुदवायेगी या नहीं पर वो उसका साथ खोना नहीं चाहती थी। जब प्रेम ने उसके गिलास में वोडका डाली और पास आकर बिस्तर पर बैठा तो उसकी नज़र प्रेम के कच्छे से झाँकते लंड पर पड़ गयी। प्रेम भी उसके वस्त्रों के अगले भाग से झाँक रहा था। उसके कपड़ों का निचला हिस्सा घुटनों तक चढ़ गया था। प्रेम समझ नहीं पा रहा था कि वो आँखों से किस अंग का सेवन करे - विशाल मम्मों का या चिकनी जांघों का।
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#2
“मैं भी शादीशुदा हूँ, कोमल। मैं अधिकतर अपनी पत्नी के साथ दगा नहीं करता, पर तुम इतनी सुंदर हो कि मैं....” वो कहते हुए रुक गया।

कोमल को भी आश्चर्य हुआ जब उसने अपने आप को यह कहते हुए सुना, “क्या तुम यह कहना चाहते हो कि तुम मेरे साथ हमबिस्तर होना चाहते हो?” शायद यह उस शराब का ही असर था जो उसने इतनी बड़ी बात इतनी आसानी से कह दी थी।

“हाँ...” प्रेम फुसफुसाकर बोला।

“तो आगे बढ़ो न ...” वो भी वापस फुसफुसाई।

जब प्रेम की बलिष्ठ बाहों ने उसे घेरा तो उसे लगा कि वो बेहोश हो जायेगी। अपने पति से विश्वास्घात करने के रोमाँच ने उसकी ग्लानि को दबा दिया था। जब प्रेम ने उसके शरीर को बिस्तर पे बिछाया तो वो उससे चिपक गयी। प्रेम ने एक प्रगाढ़ चुम्बन की शुरुआत की।

“मेरी गर्दन को चूमो और काटो” कोमल बोली, “हाँ...हाँ प्रेम ऐसे ही, और जोर से।”

जब प्रेम ने उसके वस्त्रों के पीछे लगे ज़िप को खोलने की चेष्टा की तो कोमल बोली, “जल्दी मुझे नंगा करो प्रेम... मैं तुमसे अपने मम्मों को कटवाना चाहती हूँ... उन्हें भी उसी तरह काटो जैसे तुमने मेरी गर्दन को काटा था।”

प्रेम ने रिकॉर्ड समय में उसकी यह हसरत पूरी कर दी। कोमल ने अपने शरीर को बिस्तर पर ठीक से व्यवस्थित किया।

“वाह, क्या शानदार गोलाइयाँ हैं...” प्रेम ने उसकी नंगी चूचियों को देखकर कहा।

“बातें मत करो, मेरी चुचियों को चबाओ।” कोमल ने प्रेम का चेहरा अपने स्तनों की ओर खींचते हुए कहा। हालांकि उसे तारीफ़ अच्छी लगी थी पर उसका संयम चूक सा गया था।

प्रेम ने वही किया। कोमल की चूचियाँ पहाड़ सी खड़ी थीं। “काटो, मुझे यह बहुत अच्छा लगता है... चूसो, काटो... तुम मुझे तकलीफ़ नहीं दे रहे हो। तुम जितनी जोर से चाहो चूस और काट सकते हो।”

“रुको कोमल, तुमने मुझे उन्हें जी भर कर देखने ही नहीं दिया” अपना मुँह हटाते हुए प्रेम ने कहा और उन हसीन पहाड़ियों का अवलोकन करने लगा।

“मैं तुम्हे बाद में जी भर कर दिखा दुँगी... अभी तुम उन्हे चूसो बस!” कोमल ने उसे वापस अपनी ओर खींचा।

“यह कितने कड़क हैं!” उसने उनको अपनी मुट्ठी में लेकर मसलते हुए कहा।

“जोर से!” कोमल फुसफुसाई।

“तुम्हें आदमी की जोर-जबर्दस्ती पसंद है... है न?” उसने उन मम्मों को जोर जोर से भींचना और मसलना शुरू कर दिया।

“हाँ प्रेम, मेरे साथ इसी तरह पेश आओ, जैसे कि मेरा पति नहीं करता...” उसे यह कहने में कोई संकोच नहीं हुआ। आखिर वो प्रेम से दोबारा तो कभी मिलने से रही।

“तुम्हें देखकर कोई यह नहीं मान सकता कि इतनी उच्च-स्तरीय दिखने वाली औरत ऐसी चुदक्कड़ होगी।”

“यह सच है प्रेम, इतने सालों में मैं अपने पति को उस तरह से चोदने के लिये नहीं मना पायी जैसा कि मुझे पसंद है... तुम तो उसी तरह करोगे जैसा कि मुझे पसंद है... है न प्रेम? मैं तुम्हारे लिये कुछ भी करुँगी... तुम्हारा लंड चूसुँगी और उसका रस भी पियुँगी।”

प्रेम वापस कोमल के मम्मे चूसने लगा। कोमल ने उसकी चड्डी उतार दी। वो उसका लंड चूसना चाहती थी। प्रेम का लंड मुक्त हो गया।

“मुझे खुशी है कि यह काफ़ी बड़ा है।” वो शायद सुनील के लंड से बड़ा और थोड़ा मोटा भी था। “मुझे अपनी चूत में मोटे बड़े लंड ही पसंद हैं।”

“इसे पूरा उतार दो और फ़िर देखो यह तुम्हारे अंदर कैसा लगेगा।” प्रेम ने कोमल के रहे-सहे वस्त्र उतारते हुए कहा। कोमल अब पूरी तरह नंगी थी। सिर्फ उसके पैरों में ऊँची ऐड़ी के सैंडल बंधे हुए थे।

प्रेम ने जब कोमल की चमचमाती चिकनी चूत देखी तो उससे रहा नहीं गया और उसने अपना मुँह कोमल की चूत में घुसेड़ दिया। वो उस अमृत का पान करना चाहता था।

“नहीं प्रेम, मैं तुमसे अपनी चूत अभी नहीं चटवाना चाहती... पहले मैं तुम्हारा लंड चूसना चाहती हूँ... पहले मेरे मुँह को वैसे ही चोदो जैसे तुम मेरी चूत को चोदोगे।”

प्रेम ने एक सैकंड की भी देर किये बिना अपना लंड कोमल के हसीन चेहरे के आगे झुला दिया। “मेरे लंड को अपने मुँह में डालो...” उसने कहा।

“ऊंहहहहहफ़!” जब प्रेम ने सारा लंड उसके मुँह मे पेल दिया तो कोमल के मुँह भर गया। लंड का मुँह उसके गले तक पहुँच रहा था। प्रेम ने धीरे-धीरे धक्के लगाना शुरू किया। कोमल के गाल फ़ूलने-पिचकने लगे। प्रेम ने जब अपने नीचे हो रहे दृश्य को देखा तो उसका तन्नाया हुआ लंड और सख्त हो गया। उसे लगा कि वो झड़ने वाला है।

“हाँ बेबी, पी जाओ” उसने अपना रस कोमल के फ़ूले हुए मुँह में छोड़ते हुए कहा।

कोमल को इस बात से कोई परेशनी नहीं हुई कि प्रेम इतनी जल्दी स्वाहा हो गया। वो तो अमृतपान में व्यस्त थी। और उसे विश्वास था कि वो प्रेम को जल्द ही फ़िर से सम्भोग के लिये तैयार कर लेगी।

“पिला दो मुझे अपना रस,” जब प्रेम के रस की पिचकारी ने पहला विश्राम लिया तो कोमल अपना मुँह खोलकर बोली। कोमल को लंड चूसना इतना अच्छा लग रहा था कि वो उसे छोड़कर राजी नहीं थी। उसने जब तक उसे पूरी तरह सुखा नहीं दिया, छोड़ा नहीं।

प्रेम थक कर बिस्तर पर लेट गया। “अभी मैं और नहीं कर सकता, मैनें बहुत औरतें देखीं, पर तुमसी ....!”

कोमल मुस्करायी और उसके ऊपर आ लेटी। “रंडी,” वो बोली, “अगर तुम मुझे रंडी कहोगे तो मैं बुरा नहीं मानुँगी। बल्कि शायद मुझे अच्छा ही लगे। मैं चाहती थी कि आज तुम मुझे एक रंडी की तरह ही चोदो। आज मैं वैसे ही चुदी जैसे सालों से चाहती थी। मेरे पति एक बहुत अच्छे आदमी हैं, इसलिये कभी इस तरह पेश नहीं आते।”

“मै समझ सकता हूँ जो तुम कहना चाहती हो... मेरी पत्नी भी सैक्स के प्रति बहुत सीधी है... तुम्हें विश्वास नहीं होगा मैनें आज तक उसके मुँह में अपना लंड नहीं डाला है।”

“तो आज की रात हम एक दूसरे की सहायता करेंगे” कोमल ने प्रेम को चूमते हुए कहा। “और ऐसा क्या है जो तुम तो चाहते हो पर वो नहीं करने देती? तुम चाहो तो मेरे मम्मों की भी चुदाई कर सकते हो। वाह देखो, यह फ़िर से मेरे लिये खड़ा होने लगा है!”

कोमल ने अपनी विशाल गोलाइयों को उसपर झुकाते हुए अपने हाथों से उन्हें दबाया। “तुम चाहो तो मेरे मम्मों को चोद सकते हो।”

“मेरी पत्नी तो मुझे कभी ऐसा न करने दे!” प्रेम ने अपने लंड को कोमल की चूचियों के बीच में चलाना शुरू कर दिया।

“चोदो मेरे मम्मों को!” न जाने क्यों वो इस आदमी के साथ वो सब करना चाहती थी जो उसकी पत्नी उसे नहीं करने देती थी। हे भगवान, यह कितना गर्म लग रहा है यहाँ पर... सुनील ने कभी ऐसा नहीं किया था और वो यह न जाने कब से करने को बेताब थी। सुनील को हमेशा यह डर रहता था कि कोमल को कहीं इससे तकलीफ़ न हो। काश उसे पता होता! इसी कारण से और भी कुछ था जो सुनील ने कभी नहीं किया था।

“क्या तुमने कभी अपनी बीवी की गाँड मारी है?” कोमल ने अपने मम्मों को प्रेम के लंड पर और जोर से दबाते हुए पूछा।

“अगर मैं उससे पूछुँगा भी तो वो मर जायेगी। क्या तुम यह कहना चाहती हो कि तुम मुझसे अपनी गाँड भी मरवाना चाहती हो?”

इसके जवाब में कोमल ने अपने शरीर को इस तरह मोड़ा की उसका पिछवाड़ा प्रेम के मुँह की तरफ़ हो गया। “मेरी गाँड मारो, अपने इस मूसल से मेरी गाँड की धज्जियाँ उड़ा दो!” कोमल ने जवाब दिया।

प्रेम कोमल के पीछे गया और उसने कोमल के पिछवाड़े को पकड़कर उसके इंतज़ार करते हुए छेद पर एक नज़र डाली। वो इस दृश्य का भरपूर आनंद उठाना चाहता था।

“जल्दी करो! मुझे इस बात की बिलकुल परवाह नहीं कि मुझे दर्द होगा।” कोमल ने मिन्नत की। उसने अपने हाथ पीछे करते हुए अपने कद्दू से पुट्टों को फ़ैलाया जिससे कि उसका गाँड का छेद प्रेम के लिये और खुल गया। अब कोई शक नहीं था कि वह मूसल सा लौड़ा किस रास्ते को पावन करेगा।

प्रेम का लौड़ा अपने मदन रस से गीला था, उसे किसी और चिकनाहट की आवश्यकता नहीं थी। उसने अपने लंड का सुपाड़ा गाँड के मुंहाने रखा और धुंआधार धक्का मारा।

“अरे मरी रे! इसमें तो बहुत दर्द होता है।” जैसे ही प्रेम के सुपाड़े ने गाँड को छेदा तो कोमल चीख उठी। उसके शरीर में एक तीव्र वेदना उठी। एक मिनट के लिये तो उसकी साँस ही बंद हो गयी और गाँड - उसके दर्द की तो कोई इंतहा ही नहीं थी। जब वो थोड़ा सम्भली तो बोली, “ओके प्रेम अब पूरा पेल दो अपना लंड मेरी गाँड में!”

“क्या इसमें बहुत दर्द होता है?” प्रेम ने पूछा। उसने नीचे देखा पर समझ नहीं पाया कि उसका पूरा लंड इतनी सम्करी गली में कैसे घुस पाया था।

“और नहीं तो क्या, जान निकल जाती है!” कोमल अभी भी तकलीफ़ में थी। “पर मुझे परवाह नहीं, तुम जितनी जल्दी इसकी चुदाई शुरू करो उतना ही अच्छा है... मैं जल्द ही आदी हो जाऊँगी!” उसने अपनी गाँड को पीछे धक्का दिया जिससे कि लंड थोड़ा और अंदर जाये।

प्रेम ने धीरे से आगे की ओर धक्का दिया। उसे अभी भी यह चिंता थी कि कहीं कोमल को चोट न पहुँचे। उसका लंड इतनी जोर से फ़ंसा हुआ था जितना आज तक कभी नहीं हुआ था। हालांकि उसे इस बात की फ़िक्र थी कि कोमल की गाँड को कोई नुकसान न हो पर अब उसे यह भी ख्याल आ रहा था कि ऐसा न हो कि इस आक्रमण में उसका लंड ही शहीद हो जाये। उसका जैसे जैसे लंड अंदर समा रहा था उसे अपनी रक्त-धमनियों पर दबाव बढ़ता हुआ महसूस हो रहा था।

“मुझे ऐसा लग रहा है जैसे तुम मुझे दो टुकड़ों में चीर रहे हो...” कोमल ने अपना मुँह तकिये में गढ़ाकर गहरी साँस लेते हुए कहा। आखिर यह पहला लंड था जिसने उसकी मखमली गाँड को चीरा था। “पर तुम ऐसे ही लगे रहो प्रेम, जब तक कि तुम्हारा लंड जड़ तक नहीं समा जाता।”

प्रेम ने ऐसा ही किया। उसने देर न करते हुए एक जोरदार शानदार धक्का मारा और अपने लौड़े को कोमल की गाँड में जड़ तक पेल दिया। फ़िर वो कुछ देर साँस लेने के लिये ठहरा। गाँड की माँसपेशियों का दबाव और स्पम्दन वो महसूस कर पा रहा था। एक पल तो उसे लगा कि वो तभी वहीं झड़ जायेगा।

“फ़िर से डालो, प्रेम” कोमल ने विनती की।

जब प्रेम थोड़ा संभला तो उसने अपना लंड बाहर खींचा और फ़िर दुगने जोश से वापस ठोक मारा। कोमल की स्वीकृती पाकर उसने ऐसा ही एक बार और किया, फ़िर और, फ़िर और....

“यही तरीका है! इसमें तकलीफ़ जरूर होती है, पर अब थोड़ी कम है। मुझे यह बेहद पसंद आ रहा है। मुझे पता था कि मुझे गांड-पिलाई पसंद आयेगी।”

कोमल को उसके गंतव्य तक शीघ्र पहुँचाने के लिये प्रेम ने अपना हाथ बढ़ाकर कोमल की चूत को ढूँढा और अपनी एक उंगली उस बहती हुई नदी के उद्गम में डाल दी।

कोमल के लिये अब यह बता पाना कि क्या पीड़ा थी और क्या आनंद मुश्किल हो चला था। उसकी चूत और गाँड दोनों में चल रहे आनंद को वो बर्दाश्त नहीं कर पा रही थी। दोनों यही संकेत दे रहे थे कि अब बांध ढहने को है। “प्रेम और जोर से! तेज़ और तेज़! मार लो मेरी गाँड, अपने रस से मेरी गाँड भर दो!”

प्रेम भी यही सुनना चाहता था। “ए बेबी तुम तो मेरा लंड ही छील डालोगी...” वो चिल्लाया। कोमल की गाँड ने उसके लंड पर जकड़ बढ़ा दी थी। इस कारण वह ठीक तरह से झड़ भी नहीं पा रहा था। इसी कारण उसे अपना लंड खाली करने में काफी देर लगी।

कोमल और भी बहुत देर तक मैदान में टिकी रहती पर प्रेम अब थक चुका था। यह देख कोमल तकिये पर सहारा लेकर लेट गयी। वो सोच रही थी कि आज उसने सच में एक आदमी से अपनी गाँड मरवा ही ली थी।

आज उसने दो काम ज़िंदगी में पहली बार किये थे। अपने पति से दगा और गाँड मराई।

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अध्याय - ३
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दूसरे दिन कोमल सजल को लेने उसके कॉलेज गयी। उसकी चूत कल की चुदाई को अभी भुला नहीं पायी थी और अभी तक रुक-रुक कर अपनी खुशी ज़ाहिर कर रही थी। प्रेम ने जब उसके घर का पता और फ़ोन नंबर माँगा तो उसने उसे मना कर दिया था। एक अजनबी के साथ एक ही रात काफ़ी थी। उसे वो रात सुनील के साथ बेइमानी करने के कारण हमेशा याद रहनी थी। इतना ही काफ़ी था।

कोमल खुश थी क्योंकि उसने सुबह ही कर्नल मान से बात की थी और सजल को अपने साथ होटल में रात बिताने की आज्ञा ले ली थी।

“मेरी गाड़ी खराब है और उसे ठीक करने में पूरा दिन लग जायेगा। मैं शाम को वापस घर के लिये नहीं निकलना चाहती। मैं बहुत आभारी रहुँगी अगर आप अपने नियम में ढील देकर सजल को मेरे साथ रहने की आज्ञा दे दें। मैं वादा करती हूँ मैं किसी और के माता-पापा को इसके बारे में नहीं बताऊँगी।” कोमल ने बड़ी सफ़ाई के साथ झूठ बोला था।

अपने पूरी मिठास और आकर्षण का इस्तेमाल करते हुए वो बड़ी मुश्किल से उस अड़ियल कर्नल को मना पई थी। उसे महसूस हुआ कि शायद कर्नल भी आकर उसे होटल में चोदना चाहता है। इससे कोमल को बहुत प्रसन्नता हुई। शायद इसी बात से कर्नल की स्वीकृती मिल गयी थी। उसने मन में विचार किया कि एक दिन वो इस हट्टे-कट्टे कर्नल को भी चुदाई के लिये फुसलायेगी। वो यह भी सोच रही थी कि क्या अपने बेटे के साथ होटल के एक ही कमरे में अकेले रात बिताना ठीक होगा। उसने अपने मन को मनाया कि ज़रूरी तो नहीं कि कुछ हो ही।

हालांकि वो अपने आप को समझा रही थी पर उसे पूरा विश्वास नहीं था। कुछ दिनों से वह सजल को मात्र एक माँ की दृष्टि से नहीं देख रही थी बल्कि... सजल से चुदवाने के ख्याल से ही उसकी चूत ने पानी के फ़ुहारे छोड़ने शुरू कर दिये। इस भावना के आगे वो अपने आप को कमजोर पा रही थी।

“आप सच कह रही हैं कि कर्नल मान ने रात बाहर रहने की आज्ञा दी है?” सजल ने पूछा।

“अब तुम इस बारे में चिंता नहीं करो। मुझे तुम्हे सुबह जल्दी यहाँ पहुँचाना है... इसलिये अभी जल्दी करो।”

“हम कहाँ जा रहे हैं?” सजल ने पूछा।

“यहाँ एक अच्छी पिक्चर चल रही है, उसे देखकर किसी बढ़िया से रेस्तरां में खाना खायेंगे और फ़िर होटल चलेंगे। क्या तुमने अपने तैरने के वस्त्र साथ लिये हैं?”

जब सजल ने हामी भरी तो कोमल खुश हो गयी। “हम बहुत दिन से एक साथ तैरे नहीं हैं। तुमने मुझे डाइव करना सिखाने का वादा किया था।”

“मुझे तो बिल्कुल ऐसा लग रहा है जैसे मैं किसी जवान लड़की के साथ डेट पर जा रहा हूँ।”

“ठीक है तो हम इसे डेट ही कहेंगे। कुछ ही दिनों में तुम लड़कियों के साथ घूमना-फ़िरना शुरू कर दोगे। इससे मुझे तो बड़ी जलन होगी।”

“मुझे उम्मीद है कि वो भी तुम्हारी जैसी ही सैक्सी होंगी।” सजल ने मुस्कराकर कहा। वो कोमल को बिकिनी में देखने के लिये उत्सुक था। जब वह पिछली बार कोमल के साथ तैरने गया था तो कोमल को देखकर उसका लंड खड़ा हो गया था। उसे काफ़ी देर तक पानी में रहना पड़ा था जब तक कि उसका लंड वापस अपने वास्तविक स्वरूप में नहीं लौटा था।

“क्या तुम समझते हो कि मैं सैक्सी हूँ?” कोमल को अपने शरीर में एक स्फ़ूर्ति सी महसूस हुई।

“और नहीं तो क्या? तुम क्या समझती हो, जब तुम मुझे छोड़ने आती हो तो क्यों सारे लड़के तुम्हे हेलो करने आते हैं?”

कोमल की चूत गरमा गयी पर उसने अपना ध्यान दूसरी ओर कर लिया। पिक्चर बड़ी मज़ाकिया थी। वो अपने बेटे के साथ खूब हँसी। रात के भोजन में कोमल ने अपनी वाइन सजल के साथ बाँटी। हालांकि रेस्तरां के मालिक ने इस पर एतराज़ किया था पर यह जान कर कि वो मम्मी-बेटे हैं मान गया था। जब वो होटल पहुँचे तो कोमल के दिल की धड़कन बढ़ने लगी। अगर आज रात को कुछ होगा तो शायद उससे कुछ भला ही होगा।

“मैं अपने तैरने के वस्त्र बाथरूम से बदल कर आता हूँ... लेकिन आज मैं आपको डाइव करना नहीं सिखाऊँगा क्योंकि आपने काफी ड्रिंक की हुई है “ सजल ने कहा।

“मैं तुम्हारी मम्मी हूँ, तुम मेरे सामने भी बदल सकते हो... चलो यहीं बदलो... देखो मैं भी तुम्हारे सामने ही बदल रही हूँ।”

बिना सजल के जवाब का इंतजार किये कोमल ने अपने कपड़े और सैंडल उतारने शुरू कर दिये। उसने अपनी ब्रा और चड्डी उतारने में हल्की सी देर लगाई जिससे कि सजल को कुछ उत्सुकता हो। “देखो कितना आसान है... मैं तुम्हारी मम्मी हूँ और तुम मेरे बेटे, हमें एक दूसरे को नंगा देखने में शर्म कैसी?”

“कुछ भी नहीं।” सजल के मुँह से मुश्किल से आवाज़ निकली पर अगर यह इतना आसान था तो उसका लंड खड़ा क्यों हो रहा था?

“जल्दी करो सजल, तरणताल थोड़ी ही देर में बंद हो जायेगा।” कोमल अपनी बिकिनी निकालने में मशगूल हो गयी। उसकी पीठ सजल की ओर थी पर वह सजल के नंगे जिस्म को देखने के लिये मुड़ने को तत्क्षण तैयार थी।

कोमल ने अपनी बिकिनी पहनी ही थी कि सजल ने अपनी चड्डी उतार दी। वह तेज़ी के साथ अपनी तैरने की चड्डी पहनने के लिये झपटा। पर वो कोमल के सामने थोड़ा धीमा पड़ गया। कोमल तब तक पलट चुकी थी और उसने सजल का मोटा बड़ा लंड भी देख लिया था।

“तुम काफ़ी बड़े हो गये हो, प्रिय।” उस खुशनसीब माँ ने अपने बेटे के हथियार पर एक भरपूर नज़र डाली। उसने जो देखा उससे उसका मन अती आनंदित हो गया। सजल का लंड सुनील से बड़ा और मोटा रहा होगा, कोई दस इंच लंबा और अच्छा खासा मोटा। सजल के टट्टे भी भारी थे और घनी झाँटों में छुपे हुए थे। कोमल के मुँह में पानी आ गया। पर उसने संयम बरता और कहा, “बेहतर होगा कि तुम अपनी चड्डी पहन कर तैरने चलो।” यह कहकर उसने दूसरी ऊँची ऐड़ी की चप्पलों में पैर डाले और दरवाज़े की ओर बढ़ गयी।

सजल को नंगा देखकर कोमल की दबी हुई भावनायें दोबारा करवटें लेने लगी थीं। उसे शक था कि आज की रात वो अनचुदी नहीं रहेगी। सजल भी अपने आप को संतुलित करने की कोशिश कर रहा था पर उसके मन में भी एक सागर उमड़ रहा था।

थोड़ी देर तैरने के बाद कोमल बोली, “अब बहुत ठंडक हो गयी है, चलो अंदर चलते हैं।”

कमरे में पहुँच कर दोनों काफ़ी तनाव में थे। सजल ने पहले कमरे में बिछे दोनों बिस्तरों की ओर देखा, ओर फ़िर अपनी मम्मी की ओर। कोमल समझ गयी कि वो क्या सोच रहा था। अब सच्चायी को छुपाया नहीं जा सकता था। पर उसे एक ही डर था कि अगर सजल उससे नफ़रत करने लगा तो वो क्या करेगी? कहीं वो खुद ही अपने आप से नफ़रत न करने लगे।

इन सारे शकों के बावज़ूद अपने बेटे को चोदने का ख्याल हावी था। कोमल ने अपनी बिकिनी की डोर खोलते हुए कहा, “हमें सोने के पहले नहा लेना चाहिये...” और इसी के साथ उसकी बिकिनी की ब्रा ज़मीन पर जा गिरी। सजल अपनी पैंट उतारने में अभी भी हिचकिचा रहा था।

“तुम यह कच्छा पहनकर तो ठीक से नहा नहीं सकते...” कोमल ने अपनी चड्डी उतारते हुए कहा।

वो लड़का अपनी मम्मी के शानदार जिस्म को देखकर ठगा सा रह गया। उसकी मम्मी उसके सामने सिर्फ ऊँची ऐड़ी की चप्पलें पहने बिल्कुल नंगी खड़ी थी।

“तुम जाकर पहले नहा लो मम्मी, मैं तुम्हारे बाद नहा लुँगा।”

“नहीं, हम दोनों साथ ही नहायेंगे” यह कहते हुए कोमल अपने विशाल मम्मे झुलाती हुई सजल की ओर बढ़ी। वो काफ़ी उत्तेजित थी।

“मम्मी क्या तुम समझती हो कि ये ठीक होगा?”

“अवश्य, अब तुम अपनी पैंट उतारो, या मैं उतारूँ?”

“नहीं, मैं उतार लुँगा।”

कोमल ने पानी चलाकर टब के अंदर अपना पैर रखा। जब उसने अपने पीछे सजल को आते न देखा तो आवाज़ दी कि वो अब देर न करे। नंगा लड़का बाथरूम में घुसा। कोमल उसे देखकर समझ गयी कि वो क्यों शर्मा रहा था। उसका लंड ताड़ की तरह अपनी पूरी दस इंची लम्बाई तक तनकर खड़ा था। सजल ने अपनी इस हालत के लिये क्षमा माँगने को मुँह खोलना चाहा।

“तो क्या तुम इसलिये इतने शर्मा रहे थे?” कोमल ने हँसते हुए कहा। “इसमें कुछ गलत नहीं है बच्चे!, इससे सिर्फ़ यह सिद्ध होता है कि तुम एक स्वस्थ लड़के हो। मुझे इसलिये भी खुशी है कि शायद यह मेरे कारण है।”

“आओ अंदर, पानी तुम्हारी पसंद का है, हल्का गुनगुना।” कोमल ने अपना हाथ बढ़ाकर सजल को टब में खींच लिया। उसने सजल को साबुन देकर कहा कि वो उसकी पीठ पर मले। “जोर से घिसना।”

सजल का लंड नीचे उतरने का नाम ही नहीं ले रहा था। ऊपर से उसकी मम्मी की नंगी पीठ का स्पर्श उसे और उत्तेजित कर रहा था। उसका लंबा लंड उचक-उचक कर उसकी मम्मी की गाँड को छूने की कोशिश कर रहा था।

“ऊँहुं, मुझे कुछ लगा।” कोमल खिलखिलाई जब सजल के लंड ने अपने परिश्रम में सफ़लता पायी और अपने लक्ष्य को छू लिया। वो थोड़ा पीछे सरकी जिससे कि उसे दोबारा यह सुख मिले।

“माफ़ करना मम्मी!” लड़का सकपकाकर बोला और थोड़ा पीछे हटा।

“क्यों, तुम्हारे शरीर का कोई हिस्सा मेरे शरीर को छुए तो इसमें क्या गलत है? मुझे साबुन दो, मैं तुम्हारी पीठ प लगा दूँ।”

पहले कोमल ने सजल की पीठ पर साबुन लगाया और फ़िर छाती पर। “अब मेरी छाती पर साबुन लगाने की तुम्हारी बारी है।”

“शर्माओ मत... मुझे छुओ...” कहते हुए उसने सजल के हाथ अपने मम्मो पर लगा दिये। इसके बाद कोमल ने अब तक की सबसे साहसी हरकत की। “तुम्हे अपने शरीर के हर हिस्से को अच्छे से साफ़ करना होगा, इसे भी...” कहते हुए उसने सजल का भरपूर लौड़ा अपने हाथ में भर लिया।

“ओह मम्मी!”

“मैं जानती थी कि तेरा लौड़ा ऐसा ही शानदार होगा।” कोमल उसे छोड़ने का नाम ही नहीं ले रही थी। उसने अपने चेहरे को झुकाया।

“नहीं, मम्मी हम ऐसा ... पाप...” लड़का हकलाने लगा पर उसने अपनी मम्मी को रोका नहीं।

“हमें करना ही होगा... मुझे तुम्हारी इतनी ज़रूरत है कि मैं रुक नहीं सकती... अब बहुत देर हो चुकी है... अपनी मम्मी को स्वयं को खुश कर लेने दो मेरे बेटे” कहते हुए उसने वो मूसल अपने मुँह में भर लिया।

“आआआह मम्मी, तुम्हारा मुँह!”

“ऊंह ऊंह” कोमल तो अब उस महान हथियार का स्वाद लेने में जुटी थी। वो हुंचक-हुंचक कर लौड़े को चूस रही थी। इस समय उसकी तुलना गर्मी में आई हुई बिल्ली से की जा सकती थी।

सजल भी अब चुप नहीं रहा। जब उसने यह जान लिया कि उसकी मम्मी अब रुकने वाली नहीं है, तो उसने भी अपनी मम्मी को पूरा आनंद देने का निर्णय लिया। उसने अपने हाथ बढ़ाकर उसकी चुचियों पर रखे और धीरे-धीरे मसलने लगा।

“उन्हें खींचो और उमेठो...” कोमल ने सीत्कार भरी। वो समझ नहीं पा रही थी कि इस जवान लंड का स्वाद लिये बगैर वो अभी तक जीवित कैसे थी? उसके मुँह से तो वो छूट ही नहीं पा रहा था।

हालांकि उसकी चूत उबल रही थी, पर उस प्यासी मम्मी ने पहले अपने पुत्र को पहले सम्पूर्णानंद देने का वचन लिया। वो दिखाना चाहती थी वो उसके लिये क्या कुछ कर सकती थी। “तुम मेरे मुँह में झड़ सकते हो, मेरे राजा बेटे” उसने अपनी जीभ को लंड के द्वार पर लगाये रखा।

“क्या तुम सच कह रही हो मम्मी?” सजल अब रुक नहीं पा रहा था। उसने पूरा दम लगाकर अपनी मम्मी के विशाल मम्मों को खींचा।

“मुझे इस समय दुनिया में और कुछ नहीं चाहिये।”

“तो फ़िर लो... यह मेरी पहली बार है किसी औरत के मुँह में झड़ने की।”

“आ जाओ बेटे, तुम्हारी मम्मी का मुँह तुम्हारे रस को पीने के लिये बेचैन और प्यासा है।”

सजल यही सुनना चाहता था। उसने कोमल के मम्मों को और जोर से भींच डाला। कोमल की चीख निकल गयी। पर अगले ही पल उसको अपनी जीभ पर अमृत की पहली बूँद का स्वाद महसूस हुआ।

“पियो मम्मी!” कहते ही सजल ने जो पिचकारी मारनी शुरू की तो कोमल का पूरा मुँह वीर्य से भर गया। यह सोच कर कि कोई बूँद बाहर न गिर जाये कोमल ने वापस अपना मुँह सजल के तने लंड पर कस दिया।

इस प्रक्रिया में कोमल को लगा कि कुछ हो रहा है जो उसकी समझ के बाहर है... पर क्या? फ़िर उसने जाना कि वो भी तेज़ी के साथ झड़ रही थी, बिना चुदे, बिना अपनी चूत को छुए! और ऐसे बह रही थी कि बस!

“चोद मेरे मुँह को, मॉय डियर! मैं भी झड़ रही हूँ।”

जब वासना का ज्वर समाप्त हुआ तो कोमल ने अपने बेटे को अपनी बाहों मे भर लिया और सिसकने लगी।

“मम्मी, क्या तुम ठीक हो?”

मम्मी ने अपने बेटे का एक प्रगाड़ चुम्बन लिया। “मैं इससे ज्यादा संतुष्ट कभी नहीं हुई, मॉय डियर!”

सजल ने उसकी एक चूची को कचोट कर पूछा, “मम्मी क्या तुम समझती हो कि जो हुआ वो सही था?”

“अब वापस जाने के लिये बहुत देर हो चुकी है... और मैं सोचती हूँ कि जो हुआ अच्छा हुआ। तुम क्या सोचते हो?”

“मुझे इस बारे में कुछ अजीब सा लग रहा है... पर था बहुत अच्छा... बहुत... पर मैं अब पापा से मिलने में थोड़ा परेशान होऊँगा।”

कोमल की मुस्कराहट गायब हो गयी। “हाँ ये दिक्कत रहेगी... पर हम उन्हे बता नहीं सकते। हमें ध्यान देना होगा कि हमारे आचरण से उन्हे कोई शक न हो।”

जब सजल ने हामी भरी तो कोमल बोली, “हमारे पास पूरी रात पड़ी है, प्यारे... और अभी तक मैनें तुम्हारा यह मूसल जैसा लौड़ा अपनी चूत में महसूस नहीं किया है।”

“यहाँ? टब में?” सजल ने पूछा।

“नहीं पागल, मैं चाहती हूँ कि जब तुम मुझे चोदो तो खूब जगह हो जिससे कि मैं जितना घूमना चाहूँ घूम सकूँ। मैं जानती हूँ कि जब तुम्हारा यह बल्लम मेरी चूत में घुसेगा तो मैं पागल हो जाऊँगी और तड़प-तड़पकर घूम-घूमकर चुदवाऊँगी... चलो बिस्तर पर चलो।”
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#3
उस चुदासी नंगी माँ ने अपने नंगे जवान बेटे का हाथ पकड़ा और सीधे बिस्तर की ओर बढ़ चली। उसने अपने शरीर को सुखाने के बारे में सोचा तक नहीं। बिस्तर पर जाकर पीठ के बल जा लेटी और अपनी टांगें चौड़ी कर बाहें फैलाकर बोली, “आ मेरे बच्चे, अब मुझे चोद।”

“तुमने मुझे चूसा था मम्मी, क्या मैं भी...?” सजल ने कोमल की गुलाबी चूत को देखते हुए पूछा। उसने कभी चूत नहीं चाटी थी और वो भी अपनी मम्मी को अपने प्यार की गहराई दिखाना चाहता था।

“हाँ, मेरे प्यारे! तेरा लाख-लाख शुक्र यह सोचने के लिये।” कोमल हाँफ़ती हुई बोली और अपनी चूत की पंखुड़ियों को फ़ैलाने लगी। अंदर का हसीन नज़ारा दिखाते हुए बोली, “अपनी जीभ को यहाँ डाल मेरे लाड़ले।”

जब सजल ने अपना मुँह उसके नज़दीक किया तो चूत की तीखी गंध उसके नथुनों में आ समाई। कोमल ने अपनी चूत की मम्मीस-पेशियों की फैलाया-सिकोड़ा जिससे कि गंध और बढ़ी पर सजल रुका नहीं। उसने अपने यार-दोस्तों से सुना था कि चूत चाटना बेहद ही वाहियात काम है पर उसके मन में अपनी मम्मी की फुदकती हुई चुत के लिये ऐसी कोई भावना नहीं थी। जब सजल की जीभ ने चूत की पंखुड़ियों को छुआ तो कोमल की तो जान ही निकल गयी। उसने अपना सिर उठाया जिससे कि वह अपनी चुसाई देख सके।

“मेरे प्यारे बच्चे,” वो कुलबुलाई, “अपनी जीभ मेरी चूत में जहाँ तक डाल सकते हो डाल दो... हाँ तुम बहुत अच्छा कर रहे हो।” अगर वो इस रास्ते पर चल ही पड़े थे तो पूरा ही आनंद लिया जाये, उसने सोचा।

उस भूखे लड़के को चूत की महक से नशा सा हो चला था। उसे आश्चर्य था कि वह चूत उसकी जीभ पर इतनी तंग क्यों लग रही थी। उसने अपने लंड को एक हाथ से पकड़कर रगड़ना शुरू कर दिया।

“चूसो जोर से!” जब सजल ने कोमल की चूत की क्लिट को चबाया तो वह बिल्कुल बेकाबू हो उठी। सजल को अनुभव तो कम था पर इच्छा तीव्र थी। इसलिये वो एक बेहतरीन काम को अंजाम दे रहा था। उसने तो बस यूँ ही चबाया था, क्या पता था कि उसकी मम्मी को इतना अच्छा लगेगा।

कोमल को अपनी चूत से हल्का सा बहाव महसूस हुआ पर कुछ ही क्षण में वो एक ज्वालामुखी की तरह फ़ट पड़ी। ऐसा पानी छूटा कि बस, “अरे बेटा, मैं झड़ी... झड़ी रे माँआआआँ मेरी... चूस ले मुझे पी जा मेरा पानी... मॉय डियर... मेरे हरामी बेटे... आआआआआहहहहहह हाआआआआआआआआआ”

सजल का चेहरा तो जैसे ज्वालामुखी में समाया हुआ था। कोमल ने अपनी जांघों में उसे ऐसे कसा हुआ था कि उसकी साँस रुकी जा रही थी पर वो कुछ नहीं कर सकता था। हाँ वो उस स्वादिष्ट पेय को जी भर कर पी सकता था, सो वही कर रहा था।

“तेरे मुँह में तो स्वर्ग है बेटा।” जब कोमल झड़ कर निपटी तो बोली। सजल ने भी चैन की साँस ली जब कोमल की जांघों ने अपनी पकड ढीली की। कोमल कुछ देर के लिये तो संतुष्ट हो गयी थी पर कितनी देर के लिये?

“पेल दे अब यह लौड़ा मेरे अंदर, मॉय डियर...” कोमल फुसफुसाकर सजल से बोली।

सजल को तो कुछ करना ही नहीं पड़ा क्योंकि कोमल ने उसे अपने ऊपर खींचा और अपने हाथ से उसका लंड अपनी चूत के अंदर डालना शुरू कर दिया।

“मम्मी, यह अंदर जा रहा है” सजल ने अपने मोटे लंड के सुपाड़े को कोमल की गीली चूत में विलीन होते देखकर कहा।

“क्या मेरी चूत तंग है?” कोमल ने पूछा, “क्या तुम्हारे लौड़े के लिये मेरी चूत टाइट है?”

“इतनी टाइट कि दर्द हो रहा है।” सजल ने अपनी मम्मी की चूत में अपने लंड को और गहराई तक उतारते हुए कहा। यह उसका लंड चूत में जा रहा था या किसी भट्टी में?

“शायद इसलिये कि तुम्हारा लंड ही इतना बड़ा है। मेरी तो चूत जैसे फ़टी जा रही है।”

“क्या मैं रुक जाऊँ” सजल ने चिंता से पूछा।

“ऐसा कभी न करना... मेरे साथ कभी सदव्यव्हार मत करना चोदते समय... मुझे यह मोटा लौड़ा अपनी चूत की पूरी गहराई में चाहिये... पूरा जड़ तक! तुझे मैं सिखाऊँगी कि मुझे कैसी चुदाई पसंद है... मुझे जोरदार और निर्मम चुदाई पसंद है... कोई दया नहीं... वहशी चुदाई... अब रुको मत और एक ही बार में बाकी का लंड घुसेड़ दो मेरी चूत में।”

यह सुनकर सजल ने एक जोरदार शॉट मारा और पूरा का पूरा मूसल अपनी मम्मी की चूत में पेलं-पेल कर दिया पर कोमल के लिये यह भी पूरा न पड़ा। “और अंदर” वो चीखी।

फिर तो उस जवान लड़के ने आव देखा न ताव और अपने लंड से जबरदस्त पिलाई शुरू कर दी। गहरे, लम्बे धक्कों की ऐसी झड़ी लगाई कि कोमल के मुँह से चूँ तक न निकल पायी। कोमल जब झड़ी तो उसे लगा कि वो शायद मर चुकी है। उसका अपने शरीर पर कोई जोर नहीं है। उसकी चमड़ी जैसे जल रही है। उसकी चूचियों में जैसे पिन घुसी हुई हों। उसकी चूत की तो हालत ही खस्ता थी। सजल के मोटे लौड़े की भीषण पिलाई ने जैसे उसे चीर दिया था। उसके बाद भी वो मादरचोद लड़का पिला हुआ था उसकी चूत की असीमतम गहराइयों को चूमने के लिये।

उसने अपने होश सम्भालते हुए गुहार की, “दे मुझे यह लौड़ा, पेल दे, पेल दे, पेल दे... भर दे मेरी चूत, भर दे। भर दे इसे अपने लौड़े के पानी से।”

सजल अब और न ठहर सका और भरभरा कर अपनी मम्मी की चूत में झड़ गया। कोमल अपनी चूत को उसके लंड पर रगड़ती जा रही थी।

जब दोनों शाँत हुए तो कोमल उसे चूमते हुए बोली, “मेरे शानदार चुदक्कड़ बेटे, काश हम लोग भाग सकते होते तो हम कहीं ऐसी जगह चले जाते जहाँ हम जितनी चाहते, चुदाई कर सकते।”

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अध्याय - ४
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“तुमने अपना पर्स और सैल फोन रख लिये हैं न?” घर से बाहर निकलते हुए सजल से कोमल ने पूछा।

सजल गर्मी की छुट्टियों में घर आया हुआ था। अभी वो अपने दोस्त से मिलने बाहर जा रहा था।

“चिंता मत करो मम्मी! मैं बच्चा थोड़ा ही हूँ...” सजल ने जवाब दिया।

“मेरा ख्याल है मैं तुम्हारा कुछ ज्यादा ही दुलार करती हूँ!” कोमल ने सजल को गले लगाते हुए कहा। मुझे खुशी है कि तुम छुट्टियों में घर आ गये। मुझे तो लगा जैसे पिछले दो हफ्ते कटेंगे ही नहीं। मुझे यह भी खुशी है कि तुम अब यहीं रह कर इसी शहर में पढ़ोगे। कोमल ने अपना शरीर सजल के शरीर से कस के सटा दिया। सजल के बड़े लंड का उभार कोमल की चूत पे ढकेलने लगा।

“मेरा ख्याल है कि मुझे अभी अपने दोस्त से मिलने नहीं जाना चाहिये”, सजल बोला जब उसे अपना लंड सख्त होता महसूस हुआ। कोमल के ब्लाऊज़ के ऊपर के बटन खुले हुए थे और उसकी की चूचियों का नज़ारा सजल के टट्टों में खलबली मचाने लगा था।

“हुम्म्म... अब मुझे उक्साओ नहीं... फिर तुमने अपने दोस्त से मिलने का वादा भी तो किया है... चुदाई के लिये तो अब सारी गर्मियाँ हैं और अब तो तुम यहीं रह कर पढ़ोगे!” कोमल ने पीछे हट कर सजल को समझाया। “और इस से पहले कि मैं तुम्हें बिस्तर पे खींच लूँ... तुम चले जाओ” कोमल ने हँसते हुए कामुक अदा से कहा।

सजल के जाने के बाद कोमल ने पिछले दो हफ़्तों पर ध्यान दिया। इन दिनों में इतना कुछ हुआ था। उसने प्रेम, एक अजनबी से पहली बार अपनी गाँड मरवाई थी। और जिस दिन उसने सजल के साथ अपने नए रिश्ते की शुरूआत की थी, उस रात की बेरोक घनघोर चुदाई आज भी उसे याद थी। उसने सुनील को अब सजल को यहाँ लाने के लिये मना लिया था। इसके लिये जो परिश्रम उसने किया था उससे उसकी चूत में अब दर्द सा होने लगा था। यही सब सोचते हुए वो नहाने के लिये चली गयी।

नहाने के बाद कोमल बाथरूम से बाहर आयी और खुद भी बाहर जाने के लिये तैयार होने लगी। हालांकि नहाने के बाद उसके बदन को ठंडक मिलनी चाहिये थी पर कम से कम उसके बदन के अंदर इसका उल्टा ही असर हुआ। उसके निप्पल और क्लिट पानी कि फुहार से उत्तेजित हो गये थे और उसकी चूत भी अंदर से जलने लगी थी। कोमल को उत्तेजना अच्छी लग रही थी और उसने गर्मी में बाहर जाने का प्रोग्राम रद्द किया और अपनी साड़ी उतार फेंकी और फ्रिज में से एक ठंडी बीयर निकाल कर सोफ़े पर बैठ गयी।

कोमल ने अपने सैंडल युक्त पैर सामने रखी मेज पर फैला दिये और बीयर पीते हुए एक हाथ से अपनी चूत सहलाने लगी। कोमल बहुत उत्तेजित हो गयी थी और जल्दी ही सिसकते हुए अपनी तीन अँगुलियाँ चूत के अंदर-बाहर करने लगी। वोह झड़ने ही वाली थी कि उसे लगा शायद डोर-बेल बजी है। “ओह नहीं... अभी नहीं!...” कोमल कराही। वो घंटी की तरफ ध्यान न देती अगर वोह घंटी फिर से दो-तीन बार न बजती।

दरवाजे पर जो भी था, उसे कोसती हुई कोमल उठी और जल्दी से अपने नंगे बदन पर रेशमी हाऊज़ कोट पहन कर गुस्से में अपनी ऊँची ऐड़ी की सैंडल खटखटाती हुई दरवाज़े की ओर बढ़ी। अगर ये कोई सेल्समैन हुआ तो आज उसकी खैर नहीं।

“कर्नल मान?” कोमल अचम्भित होकर बोली जब उसने दरवाज़ा खोला और सजल के कॉलेज के प्रिंसिपल को सामने खड़े पाया।

कुछ बोलने से पहले कर्नल मान की आँखों ने कोमल के हुलिये का निरक्षण किया और उसे कोमल के मुँह से बीयर की गंध भी आ गयी। “मैं क्षमा चाहता हूँ कोमल जी! मैंने अचानक आकर आपको परेशान किया... मुझे आने के पहले फोन कर लेना चाहिये था पर मैं एक मिटींग के सिलसिले में इस शहर में आया हुआ था और यहाँ पास से ही गुज़र रहा था तो... मैं... मैंने सोचा...!”

कोमल इस आदमी को अपने घर आया देखकर विस्मित थी। “पर हम आपको पहले ही बता चुके हैं कि हम सजल को आपके कॉलेज से निकालकर इसी शहर में दाखिला दिला रहे हैं, कर्नल मान! फिर आपको हमसे क्या काम हो सकता है?”

कोमल को कर्नल मान आज हमेशा की तरह निडर और दिलेर नहीं लगा। कर्नल बेचैनी से अपनी टोपी को टटोलता हुआ बोला, “मैं दो मिनट के लिये अंदर आ सकता हूँ? कोमल जी!”

“ज़रूर कर्नल... मैं क्षमा चाहती हूँ... बस आप को अचानक देख कर अचंभित हो गयी थी... प्लीज़ आइये ना... बैठिये...।” कोमल एक तरफ हटकर सोफ़े की तरफ इशारा करते हुए कहा।

कोमल ने जब कर्नल मान को सोफे की तरफ जाते हुए और बैठते हुए देखा तो वो सोचने लगी कि अपनी वर्दी के बगैर कर्नल का बदन कैसा लगेगा। कोमल का विश्वास था कि वर्दी के नीचे कर्नल का बदन संतुलित और गठीला होने के साथ-साथ किसी भी औरत को भरपूर आनंद देने में सक्षम था। कोमल उसके लौड़े के आकार के बारे में सोचती हुई बोली, “मैं बीयर पी रही थी... आप लेंगे?”

“वैसे मैं व्हिस्की या रम ज्यादा पसंद करता हूँ पर बीयर भी चलेगी...” कर्नल झिझकते हुए बोला।

“आप चिंता न करें कर्नल... आपके लिये व्हिस्की हाज़िर है! ये कहकर कोमल ने दो ग्लास में बर्फ और व्हिस्की डाली और आकर कर्नल के साथ वाले सोफ़े पर बैठ गयी। अब कहिए... क्या बात है?”

कर्नल मान ने व्हिस्की का सिप लेते हुए कहा, “कोमल जी! मैं आमतौर से कभी भी पेरेंट्स को मेरे कॉलेज से अपने लड़कों को ना निकालने के लिये इतना ज़ोर नहीं देता हूँ... पर सजल की बात अलग है... सजल में एक अच्छे आर्मी ऑफिसर बनने के सब गुण हैं... मुझे पूरा विश्वास है कि हमारे कॉलेज से ट्रेनिंग लेकर सजल आर्मी जॉयन कर के बहुत कामयाब......।”

कोमल उसकी बात बीच में ही काटती हुई बोली, “तो इस बात के लिये आप मुझसे मिलने आये थे... कर्नल मान? आप की बेचैनी देखकर मुझे लगा जैसे आप मुझ पे फिदा होकर आये हैं...।” कोमल अपनी बात पर हल्की सी हँसी और एक टाँग आगे कर के अपने सैंडल से कर्नल कि जाँघ को छुआ।

कर्नल मान का चेहरा शर्म से लाल हो गया। वोह अपना ड्रिंक पीते हुए बोला, “मैं... उम्म... आप काफी खूबसूरत हैं... कोमल जी और निस्संदेह आप पर कई लोग फिदा होंगे... पर मैं आपको विश्वास दिलाता हूँ कि... मेरा यहाँ... आने का कारण महज... कॉलेज और सजल से संबंधित था।”

“कर्नल!” कोमल अपना ड्रिंक एक ही झटके में पीने के बाद मुस्कुराती हुई बोली, “मैं आप से दो बातें कहना चाहती हूँ... पहली तो ये कि सजल की वापस उस कॉलेज में जाने की कोई संभावना नहीं है। मुझे खुशी है कि आप सजल के लिये यहाँ तक आये और गर्व भी है कि आप सजल की योग्यता से प्रभावित हैं... लेकिन आप को इस बारे में निराश ही लौटना होगा।”

सजल के बारे में स्थिति स्पष्ट करने के बाद कोमल ने दूसरा पैग अपने ग्लास में डाला और फिर कर्नल के पास खिसक कर आगे की और झुकी। कोमल का हाऊज़ कोट पहले से ही कुछ ढीला बंधा था और झुकने की वजह से उसके भारी मम्मे और भी ज्यादा बाहर को उभरने लगे। “दूसरी बात कर्नल यह है कि मेरे ख्याल से सिर्फ सजल ही आपके यहाँ आने का कारण नहीं है... मुझे पता है कि आप मुझे किस तरह से देखते हैं और यह भी पता है कि आपकी इस बाहरी औपचारिक्ता के पीछे वो आदमी छुपा है जो औरों की तरह ही मेरे लिये बेकरार है...।”

यह सुनकर कर्नल की हालत और भी खराब हो गयी। “मैं विश्वास दिलाता हूँ कोमल जी! जैसा मैंने बताया, उसके अलावा मेरा कोई उद्देश्य नहीं था... मेरे दिमाग में कभी... ये बात नहीं आयी... कि... उम्म...!”

कर्नल के विरोध पर कोमल ने अपनी हँसी रोकने की कोशिश की। कोमल पर बीयर और व्हिस्की के साथ-साथ चुदाई का नशा हावी था। कोमल ने आगे बढ़ कर कर्नल के कंधे पर अपना हाथ रखा और अपने घुटने उसके घुटनों पे दबा दिये। “कर्नल! मुझे इस बात से बहुत चोट पहुँचेगी कि तुम्हें कभी भी मुझे चोदने का ख्याल नहीं आया। अब तुम इस तरह मेरी भावनाओं को ठेस पहुँचा कर तो नहीं जा सकते... है न? कम से कम इतना तो कबूल करो कि तुम्हारे लिये मैं सिर्फ तुम्हारे स्टूडेंट की माँ नहीं हूँ... बल्कि इससे कुछ ज्यादा हूँ।”

“मेरा मतलब आपको नाराज़ करने से नहीं था... कोमल जी।” कोमल के मुँह से चुदाई शब्द सुनकर कर्नल ज़ाहिर रूप से हैरान था।

इस बार कोमल की हँसी छूट गयी। “तुम कितनी औपचारिक्ता से बोलते हो कर्नल! कभी तुम्हारा मन नहीं करता कुछ खुल कर बोलने का... कुछ अशिष्ट बोलने का... जैसे..’चुदाई’? मैं दावे से कह सकती हूँ कि तुमने कभी इन्हें ’चूचियाँ’ नहीं बोला होगा।” कोमल ने कर्नल का हाथ अपने कोट के ऊपर से अपने मम्मों पर दबा दिया।

“कोमल जी... मैं...” कर्नल हकलाया। वो इस दबंग और बेशरम औरत का सामना नहीं कर पा रहा था।

कोमल ने उसका बड़ा सा हाथ अपने हाथ में लिया। “मैं तुम्हारे ऊपर तुम्हारे जीवन का सबसे बड़ा एहसान करने जा रही हूँ, कर्नल! मैं वो करने जा रही हूँ जो शायद किसी औरत को बरसों पहले कर देना चाहिये था। क्या तुम्हारी बीवी है... कर्नल?”

“नहीं! फौज की नौकरी में मुझे कभी शादी करने का समय नहीं मिला।” कर्नल ने बेचैनी से उत्तर दिया। वो कोमल के हाथ में अपने हाथ को देखने लगा।

“तो मेरा विचार है कि तुम्हें चुदाई का भी ज्यादा मौका नहीं मिला होगा और मुझे लगता है कि अब समय आ गया है कि इस बारे में कुछ किया जाये, कर्नल!” कोमल ने कहा और उस आदमी का हाथ अपनी एक बड़ी चूंची पर दबा दिया। “अपनी अँगुलियों को मेरी चूचियों पर दबाओ और महसूस करो कि तुमने आज तक क्या खोया है।”

कर्नल मान का हाथ कोमल की गर्म चूंची पर काँपा पर वो अपनी अँगुलियों को कोमल की भारी चूंची पर कस नहीं पाया। कोमल ने अपने हाऊज़ कोट का लूप खोल दिया और कर्नल का हाथ अपनी नंगी चूंची पर रख दिया। “अब तुम देख सकते हो कि मेरे पास क्या है...कर्नल! मुझे पता है तुमने कई बार अनुमान लगाया होगा कि मेरी चूचियाँ कैसी दिखती हैं... तो, अब ये तुम्हारे सामने हैं... कसी लगीं?”

जब उसने कोई जवाब नहीं दिया तो कोमल ने कर्नल का दूसरा हाथ अपनी दूसरी चूंची पर रख दिया। फिर जब कोमल ने अपने हाथ नीचे किये तो वो यह जान कर मुस्कुराई कि कर्नल ने अपने हाथ चूचियों से हटाये नहीं थे। “ये तुम्हारे लिये ही हैं कर्नल... तुम्हारे हाथ मेरी चूचियों पर हैं... मैं खुद को तुम्हें सौंप रही हूँ... कुछ घंटों के लिये सब नियम भुल जाओ... मेरे पति और सजल बहुत समय तक वापिस आने वाले नहीं हैं... हम दोनों घर में अकेले हैं... थोड़ी ज़िंदगी जीयो कर्नल... मज़ा करो...”

“ये हुई न बात...!” कोमल धीरे से कराही जब आखिर में कर्नल की मज़बूत अँगुलियों ने उसकी चूचियों को भींचा। कोमल उस आदमी को रिझाने में इतनी मशगूल हो गयी थी कि उसे अपनी गर्मी का पूरा एहसास ही नहीं था। कर्नल के स्पर्श से उसकी चूचियाँ कठोर हो गयी थीं और उसकी चूत से भी रस चूने लगा था।

“मुझे इसमें से आज़ाद होना है...” कोमल फुसफुसायी और फटाफट अपना हाऊज़-कोट उतार फेंका। सिर्फ काले रंग के ऊँची ऐड़ी के सैंडल पहने कोमल अब बिल्कुल नंगी खड़ी थी। “क्यों कर्नल...?” कोमल मुस्कुरायी जब कर्नल उसकी नंगी चिकनी चूत को आँखें फाड़े देखने लगा। “ठीक से देख लो कर्नल... कि तुम्हें क्या मिल रहा है... ज़रा सोचो कैसा लगेगा जब मेरी गीली चूत तुम्हारे विशाल लौड़े को निचोड़ेगी... तुम्हारा लौड़ा बड़ा है... है ना कर्नल?”

“मैं... नहीं जानता कि आप के विचार में बड़ा क्या है... कोमल जी!” कर्नल ने अपना थूक निगलते हुए कहा। उसके हाथ कोमल के मम्मों पर उर भी जकड़ गये और उसकी आँखें अभी भी कोमल की चिकनी चूत पर टिकी थीं।

“देखने दो मुझे... फिर बताती हूँ कि मेरे विचार में बड़ा क्या है!” कोमल मुस्कुराती हुई बोली। कर्नल के हाथ कोमल की गर्म चूचियों को भींच रहे थे और कोमल अपने ऊपर काबू रखना कठिन हो रहा था।

“हाय रे!” कोमल ने लंबी आह भरी जब उसके हाथों ने कर्नल का विशाल लंड नंगा किया। वो उसके लंड को पूरा बाहर नहीं निकाल पायी थी क्योंकि उसके लिये कोमल को कर्नल की पैंट नीचे खिसकानी पड़ती, लेकिन जितना भी उसे दिख रहा था उससे कोमल को विश्वास हो गया था कि कर्नल का लंड किसी घोड़े के लंड से कम नहीं था। “तुम कहते हो कि मैं ये मान लूँ कि तुम्हें अँदाज़ा नहीं है कि तुम्हारा लंड इतना विशाल और भारी है... कर्नल?”

कोमल ललचायी नज़रों से उस आदमी के लंड के फूले हुए सुपाड़े को घूरने लगी। वो मोटा सुपाड़ा अग्रिम वीर्य-स्राव से चमक रहा था। इसमें कोई संदेह नहीं था कि कर्नल उत्तेजित था। एक बार कोमल ने सड़क के किनारे एक घोड़े की टाँगों के बीच उसका उत्तेजित लंड देखा था। इस समय कोमल के जहन में वही भीमकाय भुरा-लाल लौड़ा घुम रहा था। कोमल ने कई बार अपनी चूत में उस घोड़े के लंड की कल्पना की थी। कोमल का मुँह अचानक सूखने लगा और कर्नल के लंड के चिपचिपे सुपाड़े को अपने होठों में लेने की इच्छा तीव्र हो गयी।

“मेरी मदद करो कर्नल!” कोमल उत्तेजना में फुसफुसायी और उसने कर्नल को थोड़ा सा उठने के मजबूर किया तकि वो कर्नल कि पैंट उसकी टाँगों तक नीचे खींच सके। “मैं अब तुम्हारा पूरा लंड देखे बगैर नहीं रह सकती... तुम्हारे टट्टे भी ज़रूर विशाल होंगे।”

“गाँडू... साले!” अचंभे में कोमल के मुँह से गाली निकली जब उसने कर्नल का संपूर्ण भीमकाय लंड और उसके बालदर विशाल टट्टे देखे। “किस हक से तुम इसे दुनिया की औरतों से अब तक छुपाते आये हो? तुम्हारे जैसे सौभग्यशाली मर्द का तो फर्ज़ बनता है कि जितनी हो सके उतनी औरतों को इसका आनंद प्रदान करो... क्या तुम्हें खबर है कि तुम्हारा लंड कितना निराला है?”

कर्नल ने अपने लंड पर नज़र डाली पर कुछ बोला नहीं। वो कोमल की भारी चूचियों को अपने हाथों में थामे कोमल की अगली हरकत का इंतज़ार कर रहा था। उसने स्वयं को कोमल के हवाले कर दिया था ताकि कोमल जैसे भी जो चाहे उसके साथ कर सके।

कोमल ने प्यार से उसके विशाल लंड के निचले हिस्से को स्पर्श किया।

“ओहहहह कोमल जी”, कर्नल सिसका जब कोमल की पतली अँगुलियों ने उसके लंड के साथ छेड़छाड़ की। उसके हाथ कोमल की चूचियों पर ज़ोर से जकड़ गये।

“हाँ... ऐसे ही जोर से भींचो मेरे मम्मे... डर्लिंग”, कोमल ने फुफकार भरी जब कर्नक की मज़बूत अँगुलियों ने उसकी चूचियों को बेरहमी से मसला। “मैं तुम्हारे लंड को चूसना चाहती हूँ कर्नल! लेकिन पहले मैं इसे निहारना चाहती हूँ... देखो मेरे हाथ में कैसे फड़क रहा है... रगों से भरपूर है ये... मैंने कभी किसी आदमी का इतना बड़ा सुपाड़ा नहीं देखा... पता नहीं मैं इसे अपने मुँह में कैसे ले पाऊँगी!”

कोमल ऐसा कह तो रही थी पर वो जानती थी कि किसी ना किसी तरह वो कर्नल का विशाल सुपाड़ा अपने मुँह में घुसेड़ ही लेगी। इस निराले लौड़े को तो उसे चूसना ही था। उसने अंदाज़ लगाने कि कोशिश की कि ये लौड़ा कितना लंबा था और उसके अनुमान लगाया कि वो लगभग ग्यारह इंच का होगा। विश्वास से कहना मुश्किल था क्योंकि लंड मोटा भी काफी था।

“अपने सब कपड़े उतार दो कर्नल... ताकि मैं तुम्हें पूरा मज़ा दे सकूँ।” कोमल फुसफुसायी और कर्नल को वर्दी उतारने में मदद की।

“मम्म्म... मुझे मर्दों की छातियों पर घने बाल बहुत पसंद हैं।” कोमल मुस्कुरायी जब उसने कर्नल की छाती को काले-घने बालों से ढके हुए पाया। कोमल के तीखे नाखुन कर्नल की छाती को प्यार से खरोंचते हुए लंड तक पहुँचे। कोमल के हाथों की छेड़छाड़ से कर्नल कराहने और थरथराने लगा।

कोमल ने झुक कर उसके लंड के सुफाड़े पर अपनी गर्म साँस छोड़ी और इसके जवाब में कोमल ने देख कि वो विशाल लौड़ा और भी फैल गया। कर्नल के लंड के सुपाड़े पर उसका अग्रिम वीर्य-स्राव चमक रहा था और कोमल को आकर्षित कर रहा था। उसका स्वाद लेने के लिये कोमल ने अपनी जीभ की नोक से लंड के सुपाड़े को स्पर्श किया। “ऊम्म्म कर्नल... आज सारा दिन हम चुसाई और चुदाई का मज़ा लेंगे।”

“कोमल जी! आप की जीभ तो...” कर्नल मान हाँफते हुए बोला। उसने कोमल की चूचियाँ छोड़ दीं और सोफे पर पीछे टेक लगा ली ताकि ये सैक्सी गाँड वाली चुदास औरत जो भी चाहती है वो उसके भारी भरकम लंड के साथ कर सके।

“ये तुम्हारा कॉलेज नहीं है कर्नल!” उसके सुपाड़े पर अपनी जीभ फिराती हुई कोमल बोली। लंड को चूसते हुए कोमल के लाल नेल-पॉलिश लगे नाखुन कर्नल के टट्टों के नीचे प्यार से खरोंच रहे थे। “इसका कायदे-कानून से कुछ लेना-देना नहीं है... आज तुम खुद को मेरे हाथों में सौंप दो और मैं तुम्हें दिखाती हूँ कि सारे संकोच छोड़कर मज़ा किस तरह लिया जाता है... आज मेरा अंग-अंग तुम्हारे भोगने के लिये है... मैं पूरी तुम्हारी हूँ... मेरी चूत... मेरा मुँह... मेरे मम्मे... मेरा रोम-रोम तुम्हारा है।”

इन शब्दों के साथ कोमल ने अपना मुँह खोलकर जितना हो सके अपने होंठ फैलाये ताकि वोह कर्नल का भीमकाय लंड अंदर ले सके। “ऊम्म्म्म्हहह” कर्नल के सुपाड़े पर अपने होंठ सरकाती हुई वोह गुर्रायी। “अंदर घुस गया”, अपने मुँह मे उस सुपाड़े को सोखते हुए कोमल ने बोलने की कोशिश की। फिर कोमल अपने होंठों को उस विशाल लंड की छड़ पर और नीचे खिसकाने में लग गयी।

कर्नल ने सिसकते हुए कोमल के लंबे काले बाल उसके चेहरे से हटाये ताकि वो देख सके कि कोमल उसके लंड के साथ क्या कर रही है। कर्नल मान को विश्वास नहीं हो रहा था कि कोमल ने अपने छोटे से मुँह में इतना बड़ा लंड ले रखा था। जब कोमल ने उसके टट्टों को पकड़ा तो कर्नल ने उत्तेजना में अपने चूत्तड़ उठा कर अपना लंड कोमल के मुँह में ऊपर को पेल दिया।

कर्नल के लंड को और अंदर लेने के लिये कोमल अपने घुटनों पे बैठ गयी और उसने कर्नल की जांघें फैला दीं। कोमल ने उसका लंड सीधा कर के पकड़ा और उसकी गोलियों को चूसने लगी। “अमृत-रस से भरी हुई हैं न मेरे लिये... कर्नल?” कोमल ने कर्नल को शामिल करने की कोशिश करते हुए कहा। कोमल उसके औपचारिक मुखौटे को उतार फेंकना चाहती थी। कोमल उससे कबूल करवाना चाहती थी कि किसी औरत को चोदने की इच्छा के मामले में वो दूसरे मर्दों से अलग नहीं था।

“कैसा लग रहा है तुम्हें कर्नल?” कोमल ने उसके लंड को ऊपर सुपाड़े तक चाटा और फिर वापिस अपनी जीभ लौड़े से नीचे टट्टों तक फिरायी। कोमल ने अपनी मुट्ठी में उसके टट्टों को भींच दिया जिससे कर्नल एक मीठे से दर्द से कराह उठा।

“मुझे... उम्म्म बहुत अच्छा लग रहा है... कोमल जी।” कर्नल ने अपने दाँत भींचते हुए कहा।

“तुम कभी ये औपचारिक्ता और संकोच छोड़ते नहीं हो क्या... कर्नल! अच्छा होगा अगर तुम मुझे सिर्फ कोमल पुकारो और मुझे और भी खुशी होगी अगर तुम मुझे राँड, छिनाल या कुछ और गाली से पुकारो... खुल कर बताओ कि तुम्हें कैसा महसूस हो रहा है... क्या तुम्हारा लंड मेरे मुँह में फिर से जाने के लिये नहीं तड़प रहा? क्या तुम्हारे टट्टों में वीर्य उबाल नहीं खा रहा? कहो मुझसे अपने दिल की बात। मुझे एक रंडी समझो जिसे तुमने एक दिन के लिये खरीदा है...!”

कोमल ने अपनी बात कहकर कर्नल का लौड़ा अपने मुँह मे भर लिया। उसने अपना मुँह तब तक नीचे ढकेलना ज़ारी रखा जब तक कि कर्नल का लौड़ा उसके गले में नहीं टकराने लगा। कर्नल के पीड़ित टट्टे अभी भी कोमल मुट्ठी में बँद थे।

कोमल ने कर्नल की नाज़ुक रग दबा दी थी। उसे लोगों पर अपनी हुकुमत चलाना पसंद था, खासकर के औरतों को अपने काबू में रखना क्योंकि औरतों के सामने वो थोड़ी घबड़ाहट महसूस करता था। उसे औरतों की मौजूदगी में बेचैनी महसूस होती थी, इसलिए जब भी हो सके वो उन्हें नीचा दिखाने की कोशिश करता था। “चूस मेरा लौड़ा.... साली कुत्तिया!” वो दहाड़ा और उसने अपने लंड पे कोमल के ऊपर-नीचे होते सिर को अपने लौड़े पे कस के नीचे दबा दिया। “खा जा मेरा लंड... चुदक्कड़ रांड!”
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#4
“उरररर” कोमल गुर्रायी जब उसने कर्नल के मुँह से अपने लिये गालियाँ सुनीं। कोमल बड़े चाव से उसका लंड चूस रही थी और तरस रही थी कि कर्नल जी भर कर बेरहमी से जैसे चाहे उसका शरीर इस्तमाल करे। कोमल का मुँह बड़ी लालसा से उस विशाल लंड की लंबाई पर ऊपर-नीचे चल रहा था और कर्नल के टट्टों को उबलता हुआ लंड-रस छोड़ने के लिये तैयार कर रहा था।

“साली... लंड चूसने वाली कुत्तिया!” कर्नल दहाड़ा और अपने हाथ नीचे ले जा कर उसने कोमल की झुलती हुई चूचियाँ जकड़ लीं। “खा जा मुझे... चूस ले मेरे लंड का शोरबा... साली! कुत्तिया! साली! रांड! अभी मिलेगा तुझे मेरा लंड-रस! ओहह साली कुत्तिया! रांड! ये आया... मैं झड़ा!”

कर्नल इतने वेग से झड़ते हुए सोफ़े पर उछला कि कोमल के मुँह से उसका झड़ता लंड छूटते-छूटते बचा। कोमल भी उसके लंड का शोरबा पीने के लिये इतनी उतावली थी कि इतनी आसानी से उस मोटे लंड को अपने मुँह से बाहर छुटने नहीं दे सकती थी। उसने अपने होंठ उस फैलाते हुए लंड पर कस लिये और जोर से चूसते हुए अपने मुँह में बाढ़ की तरह प्रवाहित होते हुए स्वादिस्ष्ट वीर्य को निगलने लगी।

कर्नल सोफ़े पर अपनी बगल में गिर गया पर कोमल ने उसका लंड अपने होंठों से छोड़ा नहीं। उसके स्वादिष्ट वीर्य को अपने हलक में नीचे गटकते हुए कोमल और अधिक वीर्य छुड़ाने के प्रयास में कर्नल के टट्टों को भींचने लगी। “मुझे और दो कर्नल! रुको नहीं... मुझे और वीर्य चाहिये”, कोमल उसके लंड को सुपाड़े तक ऊपर चूसते हुए बोली और वीर्य की आखिरी बूँदें चूसती हुई चप-चप की तृष्णा भरी आवाज़ें निकालने लगी।

कर्नल को आखिर में उस प्रचंड औरत को अपने लंड से परे ढकेलना पड़ा। “झड़ने के बाद मेरा लंड काफी नाज़ुक हो जाता है कोमल... जी!” वो बोला।

“नहीं... ऐसे नहीं चलेगा”, कोमल फुफकारी क्योंकि उसकी भीगी चूत की प्यास तृप्ति की माँग कर रही थी। ये लंड मेरी चूत को चोदने के लिये जल्दी ही तैयार हो जाना चाहिये... पर तब तक तुम अपनी बड़ी अंगुलियाँ मेरी चूत में घुसेड़ो। कोमल ने कर्नल को सोफ़े पर एक तरफ खिसकाया ताकि वो खुद कर्नल की बगल में लेट सके। कोमल ने कर्नल का हाथ पकड़ कर अपनी जलती हुई चूत पर रख दिया। “डालो अपनी अंगुलियाँ मेरी चूत में... कर्नल!” कोमल पर व्हिस्की का नशा अब तक और भी चढ़ गया था और वोह वासना और नशे में लगभग चूर थी।

कर्नल मान की मोटी अंगुली जब कोमल की दहकती चूत को चीरती हुई अंदर घुसी तो कोमल को वो अंगुली किसी छोटे लंड की तरह महसूस हुई। कोमल ने उस अंगुली को अपनी चूत में चोदते हुए कर्नल का हाथ थाम लिया कि कहीं वो अपनी अंगुली बाहर न निकाल ले। “और अंदर तक घुसेड़ कर चोद मेरी चूत... चूतिये!”

जब इतने से कोमल को करार नहीं मिला तो वो अपने हाथ से भी अपनी क्लिट से खेलने लगी। कर्नल की अंगुली और अपने हाथ की दोहरी हरकत से जल्दी ही विस्फोट के कगार पर पहुँच गयी।

“ओह कर्नल... हरामी साले!” कोमल सिसकी जब उसकी चूत झटके खाने लगी। “मैं तेरे लंड के लिये रुकना चाहती थी... पर अब मैं खुद को झड़ने से नहीं रोक सकती! कस के ठूंस अपनी अंगुली मेरी चूत के अंदर... चोद मुझे अंगुली से... मैं... आयी... ईईईईंईंईं... मादरचोद! चोद मुझे उस अंगुली से... हाय... लंड जैसी लग रही है तेरी अंगुली... हरामी कुत्ते... मैं झड़ी रे... आंआंआंआंईईईईईई....!”

जब अपने शरीर में उठते विस्फोट से कोमल काँपने लगी तो उसकी चूत ने कर्नल की अंगुली जकड़ ली और कोमल कर्नल की बाँह पकड़ कर खींचने लगी। अपने दूसरे हाथ से कोमल पागलों की तरह जोर-जोर से अपनी क्लिट रगड़ रही थी। सोफ़े पर जोर से फ़ुदकती हुई कोमल की चूचियाँ भी जोर-जोर से काँपने लगी और कोमल एक धमाके के साथ झड़ गयी। “और अंदर.... घुसेड़ ऊंऊंऊंहहहहह....!”

कर्नल मान ने सोचा कि कुछ समय के लिये तो अब ये गरम गाँड वाली चुदक्कड़ औरत संतुष्ट हुई। लेकिन कर्नल गलत था। जैसे ही कोमल का झड़ना समाप्त हुआ उसी क्षण वो कर्नल के लंड की ओर लपकी। “इसे फिर से खड़ा कर न... प्यारे चोदू! तेरी अंगुली से तो मज़ा आया पर मुझे तेरे इस मूसल लंड से अपनी चूत चुदवानी है... खड़ा कर इसे... मादरचोद... खड़ा कर इसे!”

कर्नल का हलब्बी लंड कोमल की हर्कतों से जल्दी ही फ़ूल कर सख्त होने लगा। कोमल नशे में थी और बहुत ही बेरहमी से कर्नल के लंड पर अपनी मुठ्ठी चला रही थी। कोमल ने उसे इतना कस के अपनी अंगुलियों में तब तक जकड़े रखा जब तक ऐसा लगने लगा कि उसका फूला हुआ सुपाड़ा कसाव के कारण फट जायेगा। कर्नल के बड़े टट्टे भी कोमल की थिरकती जीभ के जवाब में सख्त हो कर झटकने लगे। “और सख्त... भोंसड़ी के... और सख्त! मुझे अपनी चूत में ये किसी बड़ी स्टील की रॉड की तरह लगना चाहिये।”

कोमल के निर्दयी हाथ कर्नल के लंड को उत्तेजना से जला और धड़का रहे थे जिससे कर्नल वेदना से हाँफने लगा। “बस ठीक है कोमल... अब ले ले इसे अपनी चूत में... मेरा लंड चोदने के लिये तैयार है।”

“हाँ... तैयार तो है...!” कोमल उत्तेजना में बोली और कर्नल के बदन पर छा गयी और अपनी टपकती चूत में उसके विशाल लंड को घुसेड़ने के लिये अपना हाथ नीचे ले गयी। कोमल ने उसके विशाल लंड को पकड़ा और उस पर बैठने के पहले रक्त से भरपूर सुपाड़े को अपनी चूत की फाँकों के बीच में रगड़ने लगी। “मुझे इस राक्षसी लंड पर बैठ कर चोदने में बहुत मज़ा आयेगा।”

“अब जल्दी से अंदर तो डालो!” कर्नल गुर्राया जब कोमल विलंब करने लगी। कर्नल का लंड उत्तेजना के मारे जल रहा था और उसके टट्टों में वीर्य का मंथन चल रहा था। उसके लंड के सुपाड़े पर कोमल की चूत के होंठों की छेड़छाड़ उसे पागल बना रही थी।

“जैसे एक असली मर्द किसी गर्म औरत से चुदाई के लिये कहता है... वैसे मुझसे बोल... मैं कोई तेरी स्टूडेंट नहीं हूँ... कर्नल... ये शालीन भाषा मेरे साथ मत बोल... तू मुझसे क्या चाहता है... मुझे ऐसे बता जैसे किसी रंडी से कहा जाता है... मुझसे सिर्फ अश्लील गंदी भाषा में बात कर...।”

कोमल ने खुद को महज इतना ही नीचे किया जिससे कि सिर्फ सुपाड़े का अग्र भाग ही उसकी चूत में प्रविष्ट हुआ। वोह कर्नल को तड़पाने के लिये इसी स्थिति में थोड़ी सी हिलती हुई उसके लंड पर दबाव डालने लगी।

“बैठ जा इस पर ... छिनाल! चल साली कुत्तिया... चोद मेरे लौड़े को! अब किस बात का इंतज़ार है...? मुझे पता है कि मुझसे ज्यादा तू तड़प रही है मेरा लौड़ा अपनी चूत में खाने के लिये... बैठ जा अब इस पर राँड...! चोद अपनी गीली चूत पुरी नीचे तक मेरे लंड की जड़ तक!”

“ये ले... साले हरामी...!” कोमल बोली और उस मोटे लंड को जकड़ने के लिये उसने अपनी चूत नीचे दबा दी। “हाय... कितना बड़ा और मोटा महसूस हो रहा है...! विशाल सख्त लौड़ा! अपना लंड मेरी चूत में ऊपर को ठाँस... चोदू! मुझे पूरा लंड दे दे... मैंने अपनी चूत में कभी कुछ भी इतना बड़ा नहीं लिया। ऐसा लग रहा है जैसे ये लौड़ा मेरी चूत को चीर रहा है...।”

कोमल सच ही बोल रही थी। ये अदभुत ठुँसायी जो इस समय उस की चूत में महसूस हो रही थी, इसकी कोमल ने कभी कल्पना भी नहीं की थी। उसे लग रहा था कि उसकी तंग चूत इतनी फैल जायेगी कि फिर पहले जैसी नहीं होगी। “मुझे पूरा चाहिये... बेरहमी से चोद मुझे कर्नल! मेरी चूत में ऊपर तक ठाँस दे... चीर दे मेरी चूत को... इसका भोंसड़ा बना दे।”

कर्नल को हैरानी हो रही थी कि इस उछलती और चिल्लाती औरत ने उसका पूरा लंड अपनी चूत में ले लिया था। उसने पहले जितनी भी औरतों को चोदा था, कोई भी उसका लंड आधे से ज्यादा नहीं ले सकी थी। उसे खुशी थी कि आखिर उसे ऐसी औरत मिल गयी थी जिसने न सिर्फ़ उसका पूरा लंड अपनी चूत मे ले लिया था बल्कि और माँग कर रही थी। “चोद इसे... भारी चूचियों वाली राँड!” वो कोमल के झुलती चूचियों को मसलते हुए बोला।

“ओह! हाँ! वही तो मैं हूँ... दो-टके की राँड! चोद अपनी बड़ी चूचियों वाली राँड को अपने इस गधेड़े लंड से... ठूंस दे मेरी चूत अपने लंड से... बना दे मेरी चूत का भोंसड़ा”, कोमल बोली और जब उत्तेजना और जोश में उसका शरीर थरथराने लगा तो वो अपनी आँखें बंद कर के अपना सिर आगे-पीछे फेंकने लगी। अपनी दहकती चूत की दीवारों पर मोटे लौड़े का घर्षण महसूस करती हुई कोमल अपना हाथ नीचे ले जा कर अपनी सख्त हुई क्लिट रगड़ने लगी। कोमल को विश्वास हो गया था कि अगर भविष्य में उसे गधे या घोड़े से चुदवाने का मौका मिला तो वो छोड़ेगी नहीं क्योंकि कर्नल का लंड भी किसी गधे-घोड़े के लंड से कम नहीं था।

जब कर्नल ने कोमल की चूचियों को एक साथ मसला और उसके निप्पलों पर चुटकी काटी तो कोमल को चरम सीमा पर पहुँचने के लिये यही काफी था। उसका बदन ऊपर उठा जब तक कि सिर्फ सुपाड़ा ही उसकी तंग चूत में रह गया था। जब सनसनाती आग उसकी चूत में धधकने लगी तो कोमल उसी तरह एक लंबे क्षण के लिये स्थिर हो गयी। फिर जितनी जोर से हो सकता था, कोमल ने उतनी जोर से अपनी चूत उस भीमकाय लंड पर दबा दी और जब तक उसका परमानंद व्याप्त रहा तब तक बहुत जोर-जोर से अपनी चूत उस लंड पर ऊपर-नीचे उछालने लगी।

“लौड़ा...! गधे का चोदू लौड़ा!” कोमल चिल्लायी और फिर भक से झड़ गयी। कोमल की अँगुलियों ने उसकी भिनभिनाती क्लिट पर चिकोटी काटी। उसकी चूत उस मोटे लंड पर सिकुड़ गयी और उसके निप्पल कर्नल की चिकोटी काटती अंगुलियों में जलने लगे। “मुझे अपना वीर्य दे मादरचोद! इससे पहले कि मैं झड़ना बंद करूँ... अपना गाढ़ा वीर्य मेरी चूत में छोड़ दे... प्लीज़... छोड़ अपना वीर्य... अबबबबब... ऊँआआआआआआआहहहह आँआँआँ ओंओंओं....!”

“ये ले मेरा रस... छूट रहा है तेरी चूत में कुत्तिया.... साली मर्दखोर”, कोमल की दहकती चूत में अपने वीर्य की बाड़ बहाते हुए कर्नल गुर्राया।

“हाँ मेरे चोदू... हाँ..!” कोमल उछलती हुई बोली। कर्नल के लंड कि आखिरी बूँद अपनी भूखी चूत से निचोड़ कर सुखा देने के बाद तक कोमल का परमानंद बना रहा। जब वो कर्नल के ऊपर, आगे को गिरी तो कोमल ने अपनी जीभ कर्नल के मुँह में ठेल दी। उसे गर्व था कि उसने कर्नल को एक असली मर्द की तरह व्यवहार करने में मदद की थी और ये भी कि कर्नल ने अपने अदभुत लौड़े से उसकी चूत की सेवा की थी।

कर्नल मान कोमल के चूत्तड़ों को भींचता हुआ बोला, “अब तो तुम सजल को वापिस हमारे कॉलेज में भेजने के बारे में पुनः विचार करोगी...कोमल!”

कोमल ने हँसते हुए कर्नल के होंठों को फिर से चूम लिया। “नहीं! यह तय हो चुका है कि सजल इसी शहर में पढ़ेगा।” कर्नल की जीभ को चूसने के बाद कोमल फिर से बोली, “पर तुम जब चाहे मुझे चोदने के लिये आ सकते हो कर्नल!”

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अध्याय - ५
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शाहीन ने कोमल को तैयार होकर अपने घर से निकलते हुए देखा। इसका मतलब था कि सुनील अब अकेला था। सजल को जाते हुए वह पहले ही देख चुकी थी। शाहीन सात साल से कोमल की पड़ोसन थी। इन सालों में उसकी कोमल से दोस्ती न के बराबर हुई थी। न ही उसे इसकी कोई इच्छा थी। हाँ, पर वो सुनील को अच्छे से जानने को बेहद उत्सुक थी पर अभी तक सुनील ने उसे कभी लिफ़्ट नहीं दी थी। पर पिछले कुछ दिनों में आये बदलाव को वह महसूस कर रही थी और उसे लग रहा था कि उसकी इच्छा-पूर्ति का समय आ गया था। आज शनिवार था और सुनील धूप सेंकने के लिये बाहर आने ही वाला होगा। उसने अपने जिस्म और कपड़ों का मुआयना किया। उसने ब्रा नुमा छोटा सा ब्लाउज़, और हल्के नीले रंग की शिफॉन की साड़ी पहनी हुई थी और साथ ही काले रंग के बहुत ही ऊँची ऐड़ी के सैंडल पहने हुए थे।

शाहीन का शौहर उसे चार साल पहले छोड़ कर चला गया था। और उसे दूसरा ऐसा कोई नहीं मिला था जिसको वो अपनाना चाहती - सुनील को छोड़कर। वो बेचैनी से सुनील का इंतज़ार करने लगी। जिन थोड़े मर्दों से उसने इन चार सालों में संबंध स्थापित किये थे वो बिल्कुल ही बकवास और बेदम निकले थे। उसे उम्मीद थी कि सुनील उसके मापदंड पर खरा उतरेगा।

जब उसने सुनील को बाहर निकलते देखा तो उसके दिल की धड़कनें बढ़ने लगीं और चूत गरमाने लगी। उसकी चूचियाँ भी तन कर खड़ी हो गईं। शाहीन ने सुनील को थोड़ा समय दिया और फिर वो भी अपने आँगन में उतर गयी।

“हेलो, सुनील।”

“ओह हेलो शाहीन!” पर उसने खास ध्यान नहीं दिया।

शाहीन को बहुत तेज़ गुस्सा आया पर आज उसने अपने आप को समझाया।

“क्या तुम मेरी थोड़ी मदद करोगे, सुनील?”

“कहो, क्या करना है?”

“क्या तुम अंदर आओगे?”

इस बार सुनील ने उसे नज़र भर कर देखा। उसकी आँखें शाहीन के छोटे से ब्लाऊज़ में से झाँकती चुचियों पर कुछ देर रुकी भी।

जब सुनील अंदर आ गया तो शाहीन ने उससे पूछा, “सुनील क्या तुम मेरे साथ एक ठंडी बीयर पियोगे? अभी काम करने के लिये मौसम बहुत गर्म है... या तुम्हे डर है कि कोमल ने तुम्हें यहाँ देख लिया तो झमेला खड़ा कर देगी?”

“नहीं, वो तो खैर दिन भर नहीं आने वाली। पर...”

“पर क्या? फिर तो चिंता की कोई बात ही नहीं है।” यह कहते हुए शाहीन उसे अंदर खींच ले गयी। कुछ ही देर में दोनों ने तीन-तीन बोतल बीयर चढ़ा लीं थीं और सुनील काफ़ी खुल गया था। उसकी नज़र अब बार-बार शाहीन के ब्लाऊज़ से झाँकते सुडौल उरोजों पर ठहर रही थी। शाहीन को तो ऐसा लग रहा था कि वो उसी समय कपड़े उतारकर उस आकर्षक आदमी से चुदवाना शुरू कर दे। पर वो पहले माहौल बनाना चाहती थी और फिर अपने शयनकक्ष में चुदवाने का आनंद ही और था।

“मुझे माफ़ करना, पर क्या तुम मेरा एक और काम कर सकते हो, प्लीज़?” शाहीन ने अपना जाल फैंका।

“तुम बोलो तो सही।”

“मेरे बैडरूम का एक दराज़ खुलता नहीं है... उसमें मेरी कुछ जरूरी चीज़ें रखी है... क्या तुम...”

उसकी बात खत्म होने से पहले ही सुनील उठकर शयनकक्ष की ओर जाने लगा। “बिलकुल, अभी लो।”

“क्या सोचते हो, खुल पायेगा?”

“पता नहीं, यहाँ अंधेरा बहुत है, सारे पर्दे क्यों गिराये हुए हैं? कुछ दिखता ही नहीं?”

“तुम्हे जो करना है उसके लिये बहुत अच्छे से देखने की जरूरत नहीं है, सुनील!” शाहीन ने हल्के से अपने ब्लाऊज़ का बटन खोलते हुए कहा। इससे पहले कि उस बेचारे आदमी को अपने आप को संभालने का मौका मिलता, उसकी आँखों के सामने कुदरत के दो करिश्मे दीदार हो गये। शाहीन ने अपना ब्लाऊज़ उतार फैंका और अपने सीने को सामने किया और तान दिया। सुनील के तो छक्के ही छूट गए।

“अब मुझे छोड़कर भागना नहीं, सुनील! जब से ज़ाकीर मुझे छोड़कर गया है मैं प्यासी हूँ... मुझे एक मर्द चाहिये... मैनें कई मर्दों के साथ ताल्लुकात बनाये पर कोई मुझे मुतमाईन नहीं कर पाया... मुझे तुम्हारी बेहद जरूरत है सुनील... मैं जानती हूँ कि तुम एक अच्छे चुदक्कड़ हो... मेरा मन कहता है कि तुम मेरी प्यास मिटा सकोगे... तुम्हे भी मेरी जरूरत है... कोमल तुम्हारा ध्यान जो नहीं रखती...” यह कहते हुए शाहीन ने अपने रहे-सहे कपड़े भी उतार फैंके। शाहीन अब सिर्फ़ ऊँची ऐड़ी के सैंडल पहने हुए बिल्कुल नंगी खड़ी थी और उसे उम्मीद थी की उसकी जवान नंगी काया को देखने के बाद सुनील का संयम टूट जायेगा।

सुनील तो जैसे सकते में था। वह उस शानदार नंगे बदन पर से अपनी आँखें नहीं हटा पा रहा था। उसकी चूत पर गिनती के बाल थे जिससे कि वह दूर से ही चमचमा रही थी।

“अगर मैंने तुम्हारे साथ कुछ किया तो कोमल मुझे मार डालेगी... यह तुम भी भली-भांति जानती हो। तुम दोनों की वैसे भी पटती नहीं है।”

“मुझे कोमल से दोस्ती करने का कोई शौक नहीं है न ही ऐसी कोई इरादा है... मैं तो सिर्फ़ तुमसे दोस्ती करना चाहती हूँ... दोस्ती से कुछ ज्यादा...” यह कहते हुए शाहीन आगे बढ़ी और सुनील की पैंट के बाहर से उसके लंड को मुट्ठी में लेने की कोशिश की। “अब बेकार में वक्त मत बर्बाद करो सुनील... मैं तुम्हारी हूँ... अगर तुम मुझे सिर्फ़ और सिर्फ़ आज ही चोदना चाहते हो और फिर कभी नहीं तो मुझे यह भी मंज़ूर है... मैं वादा करती हूँ कि कोमल को कभी पता नहीं चलेगा... आओ, मैं बहुत गर्म हूँ, मेरी चूत तो ऐसे जल रही है जैसे उसमें आग लगी हो...”

अपनी बात सिद्ध करने के लिये शाहीन ने सुनील का हाथ पकड़कर अपनी लपलपाती चूत पर रख दिया। “तुम अपने आप देख लो कि तुमने मुझे कितना गरमाया हुआ है... तुम मुझे ऐसे छोड़कर तो जाओगे नहीं... है न सुनील? तुम नहीं चाहोगे कि मैं तुम्हारे होते हुए किसी ठंडे वाइब्रेटर का सहारा लूँ।”

सुनील ने अपने हाथ को हटाने की कोई कोशिश नहीं की। कुछ सोचे बिना उसकी एक उंगली शाहीन की चूत में धीरे से जा समाई।

“तुम वाकय बहुत गर्मी में हो,” कहते हुए सुनील ने अपनी उंगली को थोड़ा और अंदर घुसाया और अपनी एक बाँह शाहीन की कमर में डाल दी।

शाहीन ने झुकते हुए सुनील के पैंट की ज़िप खोल दी, “देखूँ सुनील तुम्हारे पास मेरे लिये क्या है... देखूँ तो तुम्हारा लंड कितना बड़ा है।”

“ठीक है, जान अगर तुम्हें इतनी बेसब्री है तो मैं भी तुम्हे तब तक चोदुँगा जब तक तुम मुझे रुकने के लिये मिन्नतें नहीं करोगी... मैनें तुम्हें कई बार आंगन में अधनंगी फुदकते हुए देखा है... अगर मुझे कोमल की फ़िक्र न होती तो मैं कब का तुम्हे चख चुका होता... पर अब मैं नहीं रुकुँगा।”

“मैं भी यही चाहती हूँ कि रुकने के लिये मुझे मिन्नतें करनी पड़ें... पर मैं तुम्हे बता दूँ कि ये इतना आसान नहीं होगा... एक बार तुमने मेरी चूत और गाँड का स्वाद चख लिया तो इसके दीवाने हो जाओगे... इनके बिना फिर जी नहीं पाओगे।”

जैसे ही सुनील ने अपने कपड़े उतारना समाप्त किया शाहीन ने अपने घुटनों के बल बैठते हुए उसका लंड अपने हाथ में लेकर झुलाना शुरू कर दिया। “मैं तुम्हे बता नहीं सकती कि कितनी बार ख्वाबों में मैनें यह लंड चूसा है।” शाहीन ने हसरत भरी निगाहों से उस शक्तिशाली लौड़े को देखते हुए कहा।

“चूसो इसे शाहीन, आज तुम्हारा सपना साकार हो गया है।”

शाहीन को तो जैसे मलाई खाने का लाइसेंस मिल गया। उसने लपक कर सुनील का लंड अपने मुँह में भर लिया। उसके नथुनों में लंड की महक समा गयी। “हूँउंउंह, और”

“पता नहीं मैं इस मौके को इतने सालों तक क्यों छोड़ता आया।”

“क्योंकि तुम बेवकूफ थे, पर अब तुम होशियार हो गये हो... अब तुम्हे पता है कि तुम्हारे पड़ोस में हलवाई की ऐसी दुकान है जो मुफ़्त में जब चाहो मिठाई खिलाने को तैयार है”

“चूसो मुझे शाहीन, चूसो और मेरे रस को पी जाओ” कहते हुए सुनील ने अपना लंड शाहीन के छोटे से मुँह में जड़ तक पेल दिया और धकाधक अंदर-बाहर करने लगा - ऐसे जैसे कि वो मुँह नहीं चूत हो।

शाहीन की वर्षों की इच्छा थी कि वो सुनील के लंड का रस जी भर कर पिये और अब जब वह मौका उसके हाथ में था तो उसे लग रहा था कि वो खुशी से बेहोश न हो जाये। उसे लंड के फूलने से यह तो पता लग गया कि उसको थोड़ी ही देर में अपना पेट भरने को माल मिलने वाला है।

“शाहीन, शाहीन, शाहीन!” सुनील ने दोहराया और फ़िर उसने शाहीन का मुँह अपने रस से भर दिया। “पी अब, बड़ी प्यासी थी न तू... अब जी भर कर पी... और ले! और।”

शाहीन ने भी बिना साँस रोके, पूरा का पूरा वीर्य पी लिया। “खाली कर दो अपने टट्टों का पानी मेरे मुँह में।”

जब शाहीन ने दिल और पेट भर लिया तो उसने सुनील का हाथ पकड़ा और बिस्तर की ओर ले गयी और उसे बिस्तर पर गिरा दिया। फिर उसने अपनी गर्मागर्म पनियाई हुई चूत को सुनील के मुँह पर रख दिया। उसे तब ज्यादा खुशी हुई जब बिना बोले ही सुनील ने अपनी जीभ को उसकी चूत के संकरे रास्ते से अंदर डाल दिया और लपलपा कर चूसने लगा।

“चोद मुझे अपने मुँह से” शाहीन ने अपने बड़े मम्मों को अपने हाथों से मसलते हुए और सुनील के मुँह पर अपनी चूत को ज़ोर से रगड़ते हुए चीख मारी।

सुनील को चूत चूसने से कोई परहेज़ नहीं था। कोमल की चूत तो वो सालों से चूस ही रहा था, पर उसने और भी कई घाटों का पानी पिया था। उसे इस बात का बड़ा अचरज था कि हरेक का स्वाद अलग रहा था। कोमल की चूत शाहीन से ज्यादा मीठी थी, पर पानी शाहीन ज्यादा छोड़ रही थी।

“मेरी गाँड भी चाटो!” शाहीन फिर चीखी और उसने अपने शरीर को थोड़ा सा आगे सरकाया जिससे कि सुनील को आसानी हो। “हाँ ऐसे ही, तुम वाकय हर काम सही तरीके से करते हो।”

जब सुनील अपने काम मे व्यस्त था, शाहीन ने अपनी चूत को रगड़ना शुरू कर दिया। एक बार पहले वह इस तरह से झड़ी थी और आज तक उसे वह दिन याद था। उसे उम्मीद थी कि सुनील अपना मुँह उसकी गाँड पर से हटायेगा नहीं।

“रुकना नहीं सुनील! अपनी जीभ मेरी गाँड के अंदर डालने की कोशिश करो... मुझे एक बार यूँ ही झड़ाओ... मुझे यह बहुत अच्छा लगता है... मैं भी तुम्हारे साथ ऐसा ही करुँगी बाद में।”

और जब सुनील की जीभ उसकी गाँड में गयी तो शाहीन तो बेकाबू हो गयी। उसने अपनी चूत को बेहताशा नोचना शुरू कर दिया। “हाय अल्लाह... मैं झड़ी रे! खा जा मेरी गाँड! तू क्या चुदक्कड़ है रे! वाह! झड़ गयी रे! कितने दिन हो गये, न जाने कितने इस तरह झड़े हुए... तुम्हारा बहुत-बहुत शुक्रिया सुनील।”

जब उसका शरीर काबू में आया तो शाहीन ने नीचे उतर कर सुनील का एक गहरा चुम्बन लिया।

“मैं फिर आऊँगा, पर कोमल को इस बारे में पता नहीं चलना चाहिये।”

शाहीन ने अपना मुँह फिर से सुनील के लंड की ओर बढ़ाया,”मुझे खुशी है कि तुम मुझे फिर से चोदने के लिये आओगे... पर हम अभी पूरी तरह से फ़ारिग कहाँ हुए हैं? अभी तो मुझे यह जानदार लौड़े को अपनी चूत में अंदर डलवाना है...” यह कहते हुए सुनील का लंड शाहीन ने वापस अपने मुँह मे डाल लिया।

“यह क्या कर रही हो?” सुनील ने पूछा।

“तुम्हारे लौड़े को वापस से सख्त कर रही हूँ... ज़रा सोचो, इसके बाद मैं तुम्हें अपने इस सनम को अपनी चूत में घुसाने दुँगी... पर मुझे पहले इस कड़ा करना है... क्योंकि उसके बाद ही मुझे उस तरह से चोद सकोगे जैसा कि मैं इतने सालों से चाहती हूँ... बोलो मुझे जबरदस्त तरीके से चोदोगे न मुझे!”

शाहीन को लगभग बीस सेकंड लगे सुनील के लौड़े को अपने लिये तैयार करने में। उसके बाद सुनील ने उसके कंधों को जोर से पकड़ा और उसे उसकी कमर के बल लिटा दिया। शाहीन के हाथ ने उसके लंड को अपने हाथ में लिया और उसका मोटा सुपाड़ा अपनी सुलगती हुई चूत के मुंहाने पर लगा दिया।

“अब मुझे और इंतज़ार न कराओ...” उसने आंख बंद करते हुए कहा।

“हुरर्र!” सुनील ने एक ही धक्के में अपना पूरा का पूरा लौड़ा शाहीन की चूत में पेल दिया। जिस भीषण गर्मी ने उसके लंड का स्वागत किया वह अभूतपूर्व थी। इस जोरदार धक्के से वह खुद भी शाहीन पर जा गिरा और उसका बलिष्ठ सीना शाहीन के विशालकाय स्तनों को दबाने लगा।

लंड से भरी हुई शाहीन ने आँखें खोलीं, “मैं जानती थी, मैं जानती थी कि तुम्हारा लंड मेरे अंदर तक खलबली मचा देगा... मैं जानती थी!”

उसके बाद तो शाहीन को रोकना ही असंभव हो गया। उसने अपनी गाँड उचका-उचका कर जो चुदवाना चालू किया तो सुनील की तो आँखें ही चौधिया गईं। उसने भी दनादन अपने लौड़े से पूरे जोर के साथ लम्बे-लम्बे गहरे गहरे धक्के लगाने शुरू कर दिये। शाहीन भी उसे और जोर और गहराई से चोदने के लिये प्रोत्साहित कर रही थी।

सुनील को आश्चर्य था कि इतनी संकरी चूत में यह महाचुदक्कड़ औरत कितना लौड़ा खा सकती थी। वो जितना जोर से पेलता वह उतना ही ज्यादा की माँग करती थी। उसकी प्यासी चूत उसके लंड को केले के छिलके की तरह पकड़े हुए थी। जब उसका लंड अंदर की तरफ जाता था तो उसे ऐसा लगता था जैसे वह भट्टी उसके लंड को ही छील देगी।

शाहीन ने अपनी जीभ सुनील के मुँह में डाल दी। “मुझे और जोर से चोदो... मेरे मुँह को भी अपनी जीभ से चोदो।”

सुनील ने उसका मुँह और चूत दोनों को तन-मन से चोदना चालू रखा। जब दोनों एक साथ झड़े तो जैसे तूफ़ान आ गया। शाहीन तो जैसे उस भारी लंड को छोड़ने को ही राज़ी नहीं थी। न वो रुकी न सुनील और दोनों का ज्वालामुखी फट गया।

“हाय मेरे महबूब, फाड़ दे मेरी चूत को... मैं झड़ रही हूँ मेरे यार... ओ मेरे खुदा देख मेरा क्या हाल कर दिया इस पडोसनचोद ने। हाय रे, मैं मरी रे।!” उसके शरीर का कौन सा अंग क्या क्रिया कर रहा था इस बात से वो बिलकुल अनभिज्ञ हो चुकी थी।

जब वह थोड़ी ठंडी हुई तो शाहीन ने सबसे पहले सुनील का लंड अपने मुँह से साफ़ किया।

“क्या तुम उस दराज को आज ठीक करोगे?” उसने मज़ाक किया।

सुनील उसकी बात समझ न पाया और बोला, “नहीं आज नहीं, मैं कल आकर ठीक कर दुँगा... कल कोमल दिन भर घर में नहीं होगी और इसमें काफी समय लग सकता है।”

“मैं यहीं रहुँगी” शाहीन मुस्करायी। उसे पता था कि कल सुनील कौन सी दराज को ठीक करने आयेगा।
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#5
“सजल यह लो कार की चाभी और जाकर थोड़ी ठंडी बियर ले आओ। प्रमोद को भी अपने साथ ले जाओ।” कोमल ने सजल से कहा।

उसने उन दोनों दोस्तों को कार में जाते हुए देखा। उसकी नज़र जब प्रमोद के कसे हुए जिस्म पर पड़ी तो उसकी चूत में एक खुजली सी हुई। वो वापस घर के अंदर जाते हुए यही सोच रही थी कि क्या वो प्रमोद से अपनी प्यास मिटाने में कामयाब हो पायेगी? वो सजल के साथ तीन दिन से आया हुआ था और कोमल की उसे चोदने की इच्छा हर रोज़ तीव्र होती जा रही थी। वैसे भी वो बहुत चुदासी थी। इस पूरे हफ़्ते में वह सजल को सिर्फ़ एक ही बार चोद पायी थी। पता नहीं क्यों सुनील भी पिछले कुछ दिनों से चोदने के मूड में नहीं था। वह हर बार थकने का कारण बताकर उसे नहीं चोद रहा था। उसके दिमाग में एक बार तो यह ख्याल आया कि कहीं वह इधर-उधर मुँह तो नहीं मार रहा था, पर फिर उसने इस विचार को दरकिनार कर दिया। अभी तो उसका ध्यान इस बात पर ज्यादा था कि प्रमोद को कैसे अपने काबू में किया जाये।

उसने सजल से पहले पूछा था कि क्या उसने प्रमोद को बताया है कि वो अपनी मम्मी को चोदता है?

सजल ने जवाब दिया था, “अगर मैं कहुँगा तो वो मुझे पागल समझेगा।”

“क्या तुम्हें अपनी मम्मी को चोदने में शर्म आती है?” उसने कुछ दुख से पूछा।

“नहीं, मुझे शर्म नहीं आती पर अधिकतर लोग हमारी बात को नहीं समझेंगे...” सजल ने कहा।

“क्या तुम समझते हो कि प्रमोद मुझे चोदना चाहेगा?”

“क्या तुम प्रमोद को चोदना चाहती हो?”

“तुम्हें ईर्ष्या तो नहीं होगी न?”

“पता नहीं, मैनें कभी इस बारे में सोचा ही नहीं कि मुझे और पापा के अलावा भी कोई तुम्हारे साथ सम्पर्क रखे। पर मेरी जान-पहचान के लड़के के साथ - ये कुछ ज्यादा है... लगता है तुम्हे जवान लड़कों का शौक है।”

“यह तो मैं नहीं कह पाऊँगी, पर हाँ मुझे चुदवाने का बेहद शौक है, यह बात पक्की है।”

“अगर प्रमोद तुम्हे न चोदना चाहेगा तो?”

“पहले यह बात पता तो लगे... मैं यह जानना चाहती हूँ, पर मैं तुम्हारी भावनायें समझना चाहती थी।”

“क्या तुम हम दोनों को एक साथ चोदना चाहोगी?” सजल के प्रश्न ने कोमल को भौंचक्का कर दिया।

“मुझे डर था कि तुम शायद इसके लिये तैयार न हो...” कोमल के जिस्म में यह सोचकर कर सनसनी फैल गयी कि अगर ऐसा हुआ तो कैसा लगेगा।

सजल ने कंधे उचका कर कहा, “अगर कोई अपनी मम्मी को चोद सकता है तो वो कुछ भी कर सकता है।”

“तो फिर देखते हैं कि यह प्रोग्राम चलता है या नहीं... मुझे खुशी है कि तुम मेरे साथ हो... अब मैं प्रमोद से सही समय पर बात करुँगी।”

अब जबकि कोमल उन दोनों लड़कों की वापसी की राह देख रही थी, उसे विश्वास हो चला था कि प्रमोद को अपने दिल की बात कहने का समय आ गया था। उसने अपने कमरे में जाकर भड़काऊ कपड़े पहने जिससे कि उसका जिस्म छिप कम और दिख अधिक रहा था। आवश्यक्ता के अनुरूप उसने न चड्डी पहनी थी न ही ब्रा। साथ ही उसने अपने गोरे पैरों में चमचमाती तनियों वाली ऊँची ऐड़ी के सैंडल भी पहन लिये क्योंकि एक तो उसकी चाल सैक्सी हो जाती थी और दूसरे उसका अनुभव था कि ज्यादातर मर्द ऊँची ऐड़ी के सैंडल पहनी औरत के तरफ जल्दी आकर्षित होते हैं। इस रूप में उसे देखकर, अगर प्रमोद उसे चोदेगा नहीं तो कम से कम वो पागल तो ज़रूर हो जायेगा। इतने में ही उसने गाड़ी के वापस आने की आवाज़ सुनी और वो रसोई में सामान रखने के लिये चली गयी।

“तुम लोग इतना क्या खरीद लाये?” कोमल ने सामान देखकर पूछा।

“खूब सारी बीयर। प्रमोद को बहुत पसंद है।”

“तुम्हारी मम्मी तुम्हें पीने देती है?”

“मेरी मम्मी बहुत फारवर्ड है। वो मुझे मेरे दोस्तों के साथ ऐसा बहुत कुछ करने देती है जो कि दूसरे माँ-बाप सोचने के लिये भी मना करते हैं।”

“उदाहरण के लिये...?” कोमल ने टेबल पर आगे झुकते हुए पूछा जिससे कि उसके मम्मों कि झलक प्रमोद को मिले। उसने देखा कि प्रमोद को अपनी आँखें हटाने में मुश्किल हुई थी।

“बहुत सारी... मैं जितनी देर चाहूँ बाहर रह सकता हूँ... मैं जितनी चाहे उतनी लड़कियों के साथ घुम-फिर सकता हूँ और...”

“यह तो बहुत अच्छी बात है... एक लड़के को लड़कियों के साथ सम्पर्क का ज्ञान होना बहुत जरूरी है, खास तौर पर शादी के पहले... है न सजल?” कोमल ने जब सजल से पूछा तो वो समझ गया कि उसकी मम्मी बात को किस तरफ ले जा रही थी।

“बिल्कुल ठीक मम्मी...” उसने हाँ में हाँ मिलायी।

कोमल एक ग्लास लेने के लिये उठी और रसोई में वाशबेसिन पर कुछ इस तरह झुकी कि उसकी मिनी-स्कर्ट ऊपर उठ गयी। उसने ग्लास निकालने में जरूरत से ज्यादा समय लिया। उसके बाद कुर्सी पर बैठने की बजाय वह प्रमोद के ठीक सामने टेबल के किनारे ही बैठ गयी। प्रमोद ने दूसरी ओर देखते हुए बीयर पीने का बहाना किया। वह किसी औरत के इतना पास होने से थोडा नर्वस हो रहा था। उसे समझ नहीं आ रहा था कि वो क्या चाहती थी।

“तुम जानते हो प्रमोद, मैं तुम्हारी मम्मी से भी ज्यादा उन्मुक्त स्वभाव की हूँ... मेरी तरफ से सजल को पूरी छूट है कि वो जिस लड़की के साथ चाहे घूमे और उसके साथ जो मर्जी हो वो करे... तुम समझ रहे हो न मैं क्या कह रही हूँ।”

वो लड़का थोड़ी झिझक के साथ बोला, “जी शायद समझ रहा हूँ।” यह कहते हुए उसकी नज़र अपने सामने परोसी हुई मखमली जांघों और गोरी सुडौल टाँगों और ऊँची ऐड़ी के चमचमाते सैंडलों में कसे सैक्सी पैरों पर टिकी हुई थीं।

“हो सकता है कि तुम्हें मेरी बात ठीक से समझ नहीं आई हो... मेरा मतलब है लड़कियों के साथ सम्भोग करने का।” यह कहकर कोमल प्रमोद पर अपनी बात का प्रभाव देखने के लिये रुकी।

प्रमोद को तो जैसे बिजली का झटका लगा हो। वो उस औरत का मुँह ताकता रह गया। सजल की मम्मी सजल के सामने उससे ऐसी बात कैसे कह सकती थी।

“मेरे ख्याल से प्रमोद भी किसी भी औरत के साथ सम्भोग करने के लिये मुक्त है... तुम्हारी मम्मी क्या कहेगी अगर तुम अपनी उम्र से बड़ी किसी औरत से संबंध बनाओगे?” यह कहते हुए कोमल अपने ऊँची ऐड़ी के सैंडलों से धीरे-धीरे प्रमोद के पांव को सहला रही थी। वो प्रमोद के शरीर का कम्पन महसूस कर सकती थी।

“पता नहीं आँटी,” उसने सजल की ओर सहायता के लिये देखा, “मैंने इस बारे में कभी सोचा ही नहीं।”

कोमल धीरे से हँसी, “तुम क्या समझते हो मैं तुम्हारी इस बात पर यकीन कर लुँगी? हर जवान लड़का अपने से उम्रदराज़ औरत को चोदना चाहता है... मैं जानती हूँ कि सजल इस बारे में क्या सोचता था।” उसने अपनी इस बात से ज़ाहिर कर दिया कि उसकी मंशा क्या थी।

प्रमोद ने सजल की ओर देखा। सजल ने हामी में अपना सिर हिलाया कि वह सही समझ रहा था।

“तुम सही सोच रहे हो प्रमोद... मैं सजल को चोदने की ट्रेनिंग दे रही हूँ... क्या तुम नहीं चाहोगे कि मैं तुम्हें भी यह शिक्षा दूँ... मैं जानती हूँ कि तुम मुझे चोदना चाहते हो क्योंकि तुम जिस तरह से मेरे शरीर को देख रहे थे उसका कोई और मतलब हो ही नहीं सकता।”

कोमल ने बीयर की बोतल प्रमोद के हाथों से ली और उसका ठंडा हाथ अपने नंगे पेट पर रख दिया। फिर आहिस्ता से उन्हें अपनी चूचियों पर लगा लिया।

“देखो ये कितने बड़े और गर्म हैं... हाय, तुम्हारे हाथ कितने ठंडे हैं... पर चिंता मत करो थोड़ी ही देर में ये भी गर्मा जायेंगे।” कोमल ने अपने उसके हाथों से दबाते हुए कहा।

प्रमोद तो जैसे सपना देख रहा था। किसी औरत के मम्मों को वो सचमुच में दबा रहा था यह उसे अभी तक विश्वास नहीं था। उसे परसों की रात याद आई जब उसने कोमल के नंगे शरीर के बारे में सोचते हुए मुठ मारी थी। उसने कितने अच्छे से बाथरूम साफ़ किया था उसके बाद - यह सोचकर कि कहीं उसके वीर्य के अवशेष कोमल को न मिल जायें। और अब वह उसी औरत की छातियों में अपना हाथ डाले हुए बैठा था।

“अपने हाथ मत हटाना,” उसने प्रमोद से कहा। “सजल, मेरा टॉप तो उतार ज़रा। प्रमोद को भी तो अपने मम्मों की छटा दिखाऊँ!”

सजल ने अपनी मम्मी की आज्ञा मानी और कोमल के दोनों स्तन अपनी पूरी बहार में खिल उठे।

“अब तुम दोनों एक-एक बाँट लो। सजल एक तुम दबाओ और प्रमोद एक तुम।” कोमल ने एक अच्छे शिक्षक की तरह समझाया। “दबाओ मेरे बच्चों... आहा”

जब दोनों लड़के उसके मम्मों के साथ खिलवाड़ कर रहे थे, कोमल ने प्रमोद की शर्ट उतार डाली। “तुम्हारी छाती तो बड़ी चिकनी है...” फ़िर उसके हाथ प्रमोद की पैंट की ओर बढ़े। उसने धीरे से उसकी बेल्ट खोली और फ़िर पैंट।

“देखूँ तुम मुझसे क्या छिपा रहे थे...” कहकर उसने प्रमोद की पैंट उतार दी और दूसरे ही क्षण इससे पहले कि प्रमोद कुछ समझ पाता उसकी चड्डी भी जमीन चाट गयी।

“अच्छा है, प्यारा और सख्त...” कोमल ने खुशी का इज़हार किया। वह सजल की तरह बड़ा नहीं था पर फिर भी काफी सख्त और मज़बूत था। उसे अपनी मुट्ठी में लेकर सहलाते हुए कोमल बोली, “और गर्म भी।”

“ऊँहह” कहते हुए प्रमोद ने अपनी पकड़ कोमल की चूची पर और तेज़ कर दी। उसने एक नज़र अपने हाथ में मौज़ूद चूची पर डाली और तय कर लिया कि उसे आगे क्या करना है।

“तुम इसे चूस सकते हो, प्रमोद... चूसो और इसका स्वाद लो... तुम भी सजल।”

प्रमोद के होंठ खुले और कोमल की चूची के काले निप्पल पर सध गये। उसने धीरे से चूसना चालू किया। फिर थोड़ा जोर से और जब देखा कि कोमल को इससे आनंद मिल रहा है तो और तेज़ी दिखाई। उधर सजल ने भी यही कार्यक्रम शुरू किया हुआ था। कोमल तो जैसे स्वर्ग की ओर जा रही थी। कोमल दो- ढाई बोतल बीयर पी चुकी थी और उस पर सुरूर छाया हुआ था।

“मम्म्म... प्रमोद... मुझे खुशी है कि तुम सजल के साथ आये” कोमल ने नीचे हाथ बढ़ाकर प्रमोद का तैयार लंड अपने हाथ में ले लिया। वो कुछ बेसब्र सी हो रही थी और जल्द ही दोनों जवान छोकरों के लौड़ों को अपने मुँह और चूत में एक साथ महसूस करना चाहती थी।

“उठो जवानों, और मेरे पीछे आओ...” कहकर वह अपने सैंडल खड़खड़ाती शयनकक्ष की ओर बढ़ गयी।

उसके दोनों खिलाड़ी बिना कुछ कहे उसके पीछे हो लिये। बिस्तर के पास पहुँचकर उसने अपने सैंडल छोड़कर बाकी सारे कपड़े उतारे और बिस्तर पर घुटनों और हाथों के बल झुक गयी। जब प्रमोद ने कमरे में कदम रखा तो वह पूरा नंगा था पर सामने का दृश्य देखकर उसके होश उड़ गये। सामने चौड़े फैले हुए चूतड़ देखकर वो हक्का बक्का रह गया।

“प्रमोद, यहाँ मेरे सामने आकर बैठो।”

सजल भी अपने कपड़े उतार रहा था। वह अपनी मम्मी के पीछे जाकर खड़ा हो गया। वो जानता था कि उसकी मम्मी उसके लौड़े को कहाँ प्रयोग में लाना चाहती थी। जैसे ही वह नंगा हुआ उसने कोमल के पुट्ठों पर हाथ रख कर आगे झुका।

“ठोक दे अंदर अपना लौड़ा, सजल” कोमल ने कंपकंपाती आवाज़ में निर्देश दिया। साथ ही उसने प्रमोद के लंड के साथ अठखेलियां शुरू कर दीं। फिर अपना सिर झुकाते हुए एक ही बार में प्रमोद का पूरा लौड़ा अपने मुँह में भर लिया और तेज़ी से चूसना शुरू कर दिया। “हुम्म्म्म ..”

प्रमोद की तो इस अचानक आक्रमण से साँस ही रुक गयी। वो अपने हाथों के बल पीछे झुक गया और अपने तने लंड को कोमल आँटी के मुँह में अंदर-बाहर होते देखने लगा। सजल ने भी अपने आगे के नज़ारे को देखा। हालांकि उसका लौड़ा कोमल की चूत में जाने को बेकरार था पर वो इस सीन को भी छोड़ना नहीं चाहता था।

“अब तुम किसका इंतज़ार कर रहे हो, सजल?” कोमल गुस्से से चीखी, “डाल दे अपना लौडा मेरी चूत में और चोद मुझे... चल जल्दी कर!”

सजल का मोटा, लंबा लंड अपनी मम्मी की चूत को चीरता हुआ अंदर घुस गया। वह तब तक अपना लंड उसकी चूत में ठुंसता गया जब तक कि उसके टट्टे कोमल की गाँड से नहीं जा टकराये। उसके इस जोरदार धक्के ने कोमल को आगे धकेल दिया जिससे कि उसके मुँह में प्रमोद का लंड पूरा भर गया। उस चुदासी औरत ने अपने शरीर को पीछे धकेला जिससे कि सजल का लंड और अंदर जाये। इसके साथ ही वो आपने आप को पेंडुलम की तरह आगे-पीछे करने लगी। कभी उसके मुँह में लंड होता तो कभी उसकी चूत में। वह अपने इस आनंद का भरपूर सुख लेना चाहती थी क्योंकि वो जानती थी कि वो दोनों लड़के जल्दी ही झड़ जायेंगे। वह इस घटना के पहले कम से कम एक बार स्खलित होना चाहती थी।

“आँटी, आँटी, मेरा लंड........” प्रमोद सिर्फ इतना ही बोल पाया। उसके सिर ने एक झटका खाया और उसने अपना गाढ़ा ताज़ा वीर्य कोमल के प्यासे मुँह में छोड़ दिया।

कोमल ने भी किसी पाइप की तरह उस लंड के रस को पूरी तरह पी लिया। सजल ने अपनी अँगुली से उसकी चूत की क्लिट को दबाना शुरू कर दिया था जिससे कि उसके पूरे शरीर में सनसनाहट फैल गयी थी और वह भी जबरदस्त तरीके से झड़ने लगी थी। उसने अपनी चूत की पेशियों को सजल के लंड पर कस दिया जिससे कि वह भी उन दोनों के ही साथ झड़ जाये।

“तू भी, सजल... झड़... झड़ तेरी मम्मी को तेरा पानी चाहिये... भर दे उससे मेरी चूत... मैं झड़ रही हूँ... प्रमोद भी... तू भी आ....”

सजल का लंड फूल गया। उसके टट्टों में तो जैसे आग भर गयी। उसके लौड़े से वीर्य की एक तेज़ धार निकली और उसकी मम्मी की चूत में जा समाई।

“ये लो मम्मी” वो आनंद की अधिकता से चीख पड़ा, “ये लो, ताज़ा और गर्मागर्म!”

कोमल भी इस समय फिर से झड़ रही थी। उसने प्रमोद का लंड अपने मुँह से तभी निकाला जब वह पूरी तरह झड़ गयी।

“तुमने कभी चूत चाटी है, प्रमोद?” कोमल ने पूछा।

“नहीं तो...” प्रमोद ने कोमल की ताज़ी चुदी चूत में से बहते सजल के पानी पर नज़र डालते हुए जवाब दिया।

कोमल अपनी पीठ के बल आराम से लेटती हुई सजल से बोली, “बेटा इसे सिखा तो ज़रा कि मैनें तुझे चूत चाटना कैसे सिखाया था।” कोमल ने अपनी टाँगें फैला लीं जिससे सजल को आसानी हो और प्रमोद को भी पूरी प्रक्रिया साफ़-साफ़ दिखाई पड़े।

सजल को अपने दोस्त के सामने अपनी काबिलियत दिखाने का जो मौका मिला था वह उसे छोड़ना नहीं चाहता था। उसने अपना चेहरा गंतव्य स्थान पर लगाया और अपनी अँगुलियों से चूत की कलियों को अलग करते हुए अपनी जीभ अंदर डाल दी और चटाई शुरू कर दी। प्रमोद को वो इस तरह दिखा रहा था जैसे वो चूत-रस नहीं बल्कि रसमलाई खा रहा हो।

“चाट बेटा चाट!” कोमल ने सिसकी ली और एक नज़र प्रमोद के चेहरे पर डाली।

प्रमोद वाकय इस रस्म में लीन था और उसने अपना चेहरा और पास किया जिससे कि उसे पूरा प्रोग्राम अच्छे से दिखे। उसे आँटी की चूत की भीनी-भीनी खुशबू भी आने लगी थी।

“मेरे मम्मों के साथ खेलो और सजल को मेरी चूत खाते हुए देखो।”

प्रमोद ने आँटी की चूचियाँ मसलते हुए पूछा, “क्या मैं भी इसमें हिस्सा ले सकता हूँ, आँटी?”

चुदासी क्या चाहे? चुदक्कड़! “वैसे ही करना जैसे सजल कर रहा था... अपनी जीभ से वैसे ही चाटना... ठीक है? जा अब लग जा काम पर।”

“अरे मेरा प्यारा बच्चा... चाट, चाट, चाट... अपनी जीभ डाल अंदर।”

प्रमोद ने थोड़ा जोर लगाकर अपनी जीभ को अंदर धकेल दिया।

“चोद मुझे अपनी जीभ से, प्रमोद... क्या तुम जानते हो कि मेरी क्लिट कहाँ है?”

“मेरे ख्याल से जानता हूँ...” और उसने अपनी जीभ उस स्थान पर लगाई जिसे वह क्लिट समझता था।

“सही! हाँ! तुम जानते हो... तुम जानते हो... अब तुम वापस अपनी जीभ मेरी चूत में डाल दो।”

जब प्रमोद कोमल की चूत का रस ले रहा था, सजल अपनी मम्मी के मम्मों पर पिला पड़ा था। वो अपनी मम्मी को अपने दोस्त के साथ बाँटकर काफी खुश था, हालांकि उसने इसकी उम्मीद नहीं की थी। उसका लंड एक बार फिर से तन्नाने लगा था।

“ये सब बंद करो और मेरी क्लिट को जोर से काटो।”

प्रमोद के ऐसा करते ही कोमल ने एक बार फिर से पानी छोड़ दिया।

“बहुत अच्छा प्रमोद... मज़ा आ गया।”

कोमल अब झड़ते-झड़ते थक चुकी थी। उन दोनों जवानों ने उसकी भूख मिटा दी थी। उसने पहले प्रमोद और फिर सजल का एक गहरा चुम्बन लिया, और टेक लगाकर लेट गयी।

“मुझे उम्मीद है कि तुम्हारी मम्मी अगली छुट्टियों में भी तुम्हें यहाँ आने की इज़ाज़त देगी... है न प्रमोद?” कोमल ने पूछा।

“क्यों नहीं, और मैं अगली बार ज्यादा दिनों के लिये आऊँगा।”

“मैं तुम्हारे आनंद के लिये पूरा इंतज़ाम रखुँगी...” कोमल ने कहा और उसी हालत में नंगी, सिर्फ सैंडल पहने हुए रसोई की ओर सबके लिये नाश्ता बनाने के लिये बढ़ गयी।

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अध्याय - ७
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“जल्दी करो और अपनी पैंट उतारो, सुनील...” शाहीन ने अपने पड़ोसी से कहा, “मैं तो समझी थी कि शायद कोमल घर से जाने वाली ही नहीं है।”

सुनील ने जल्दी करने की कोशिश की पर उसकी नज़रें शाहीन पर ही टिकी थीं जो अपने मम्मों को अपने हाथों में थामे चुदवाने के लिये पूरी तरह से तैयार खड़ी थी।

“वो थोड़ी ही देर के लिये गयी है... पैंतालीस मिनट में वापस आ जयेगी... मुझे उससे पहले घर पहुँचना होगा... वैसे भी मुझे गोल्फ खेलने जाना है”

“क्या कहा तुमने? तुम्हारे लिये गोल्फ खेलना मुझे चोदने से ज्यादा ज़रूरी है?”

“मैं विवश हूँ... वो मेरी कम्पनी का एक बहुत बड़ा ग्राहक है... जाना ही होगा...”

“हाय अल्लाह, मैं यह तो समझ सकती हूँ कि कोमल एक जल्दबाजी की चुदाई के लिये तैयार हो सकती है क्योंकि वो तुम्हारी बीवी है। पर मेरी चूत की प्यास मिटाने के लिये तो तुम्हें ज्यादा वक्त निकालना ही होगा... पैंतालीस मिनट में मेरा कुछ नहीं बनेगा...” शाहीन ने सुनील के मोटे तगड़े लौड़े पर एक नज़र डालते हुए कहा।

“आज के लिये तो इतना ही हो पायेगा, शाहीन!” सुनील शाहीन को बिस्तर की ओर लेकर जाते हुए बोला।

“अगर ऐसा है तो मेरी खातिरदारी शुरू करो... पहले मेरे मम्मों को चूसो...” शाहीन ने हथियार डालते हुए कहा।

सुनील ने अपने कम समय देने का मुआवज़ा देने का फैसला किया। उसने एक हाथ से शाहीन की चूचियाँ मसलनी शुरू की और दूसरे हाथ से उसकी चूत की सेवा शुरू कर दी। उसने दो अँगुलियाँ शाहीन की चूत में घुसेड़ दीं। अपने दाँतों से उसने शाहीन की दूसरी चूची का निप्पल काटना शुरु कर दिया।

“कचोट लो उन्हें डियर! और एक अँगुली और डालो मेरी चूत में!” शाहीन ने विनती की। उसने सुनील का लंड हाथ में लिया और उसे सहलाना शुरू कर दिया। वो सुबह से चुदवाने को बेचैन थी और उसका पूरा जिस्म वासना की आग में झुलस रहा था। उसने सुनील की मुठ मारनी शुरू कर दी।

“पहले मुझे ज़रा नाश्ता तो कराओ...” कहते हुए उसने लेटते हुए सुनील का लंड अपने मुँह में ले लिया।

शाहीन ने पूरे जोर-शोर से अपनी भूख मिटानी शुरू कर दी। वो तो उसे कभी न छोड़ती अगर सुनील जल्दी में न होता। उसने बेमन से सुनील का लंड अपने मुँह से निकाला।

“अब तुम मुझे चोदो राजा... वही पुराने तरीके से... तेज़ और गहरे... पेल दो ये मूसल मेरी चूत में।” शाहीन ने सुनील के लंड को अपनी चूत के मुँह पर रखकर कांपते हुए स्वर में सुनील से मिन्नत की।

“अरे मादरचोद!” जैसे ही वह हलब्बी लौड़ा अंदर गया शाहीन के मुँह से चीख निकली। सुनील ने एक ही धक्के में अपना पूरा लंड अंदर जो पेल दिया था। “दे दो मुझे ये पूरा लंड़ पर जल्दी झड़ना नहीं... मुझे कई दफा झाड़े बिना मत झड़ना... मुझे कई दफा झड़ना है... कई दफा...”

सुनील के लिये ये कोई आसान काम नहीं था। वो जितनी ताकत और तेज़ी से शाहीन को चोद रहा था उसमे अपने आप को काबू में रखना मुश्किल था। उसने अपना ध्यान दूसरी ओर करने की कोशिश की जिससे वह जल्दी न झड़े। उसने गोल्फ, अपनी नौकरी और अपने दोस्तों के बारे में सोचने की कोशिश की।

जब पहला झटका आया तो शाहीन फिर चीखी, “वाह रे मेरे ठोकू! चोद मुझे... मैं जली जा रही हूँ... मेरी चूत में आग लगी हुई है... झड़ना नहीं, मेरा इंतज़ार करना, सुनील।”

सुनील खुद आश्चर्यचकित था कि इस घनघोर चुदाई के बावज़ूद वो अभी तक टिका हुआ था। उसका हौसला बढ़ा और उसने पूरी चेष्टा की कि शाहीन झड़-झड़ कर बेहाल हो जाये।

“तुम नीचे आओ...” शाहीन बोली।

“पर हमारे पास ज्यादा समय नहीं है।”

पर शाहीन नहीं मानी और सुनील को पीठ के बल लिटाकर उसके लंड को अपनी बुर में ठूंस कर कलाबाजियाँ खाने लगी।

“मैं फिर से झड़ रही हूँ!” पर वो रुकी नहीं। दो ही मिनट में वो फिर बोली, “फिर से झड़ी, वाह क्या ज़िंदगी है!”

सुनील शाहीन के पुट्ठे पकड़ कर उसे अपने लंड पर कलाबाजी खाने में मदद कर रहा था। वो उस चुदासी औरत की उछलती छातियों को देखने में इतना मस्त था कि उसे अपनी संतुष्टि का ख्याल ही नहीं आया। शाहीन के जिस्म ने एक झटका लिया और वो सुनील के ऊपर ढह गयी। उसने सुनील का एक दीर्घ चुम्बन लिया और वह बिस्तर पर कुतिया वाले आसन में आ गयी। उसका लाल चेहरा तकिया में छुप गया।

“एक बार मुझे इस आसन में और चोदो फिर मैं तुम्हें छोड़ दुँगी।”

सुनील ले अपने सामने फैली हुई गाँड को देखा तो उसके मुँह में पानी आ गया। उसने अपने हाथों से अपने भारी लंड को संभाला और शाहीन के पीछे जाकर अपना लंड उसकी गीली चूत में जड़ तक समा दिया। इस बार उसने इस बात का ध्यान नहीं दिया कि शाहीन झड़ेगी या नहीं। आखिर यह उसका भी आज का अंतिम पराक्रम था।

“इतना गहरे तो पहले तुम कभी नहीं गये, सुनील...” शाहीन बोली, “चोदो इस चूत को और तुम भी झड़ो और मुझे भी तारे दिखा दो।”

सुनील को हमेशा इस बात से और उन्माद आता था जब उससे चुदा रही औरत इस तरह की अश्लील भाषा का प्रयोग करती थी। उसने अपनी रफ़्तार तेज़ कर दी। उसके लंड से निकली वीर्य की धार शाहीन की धार के साथ ही छूटी। दोनों जैसे स्वर्ग में थे।

“हाय मेरे अल्लाह! इतना मज़ा! यही ज़न्नत है! और तुम फरिश्ते हो, सुनील!”

सुनील ने अपना सिकुड़ा हुआ लंड एक पॉंप की अवाज़ के साथ बाहर निकाला। उसने घड़ी देखी तो जल्दी से कपड़े पहनने लगा। उसका ग्राहक आने ही वाला था।

“मैं चलता हूँ...” उसने जल्दी से विदा माँगी।

“तुम बड़े रूखे इंसान हो।”

“मैं तुम्हे बाद में मिलुँगा... अभी मुझे वाकय जल्दी है।”

शाहीन भी उठकर नहाने चली गयी। हालांकि उनकी चुदाई तेज़ और तीखी रही थी पर उसे याद नहीं पड़ता था कि वह इतनी बार कभी झड़ी हो। उसने दो जबरदस्त पैग बनाकर पीये और एक लंबा स्नान लिया। फिर वोह बाहर जाने के लिये तैयार हुई और हमेशा की तरह भड़कीले कपड़े पहने। अभी उसने अपने ऊँची ऐड़ी के सैंडल पहने ही थे कि इतने में ही उसके दरवाज़े पर दस्तक हुई। यह सोचकर कि शायद सुनील का गोल्फ का साथी नहीं आया, उसने तत्काल ही दरवाज़ा खोला। पर उसे यह देखकर आश्चर्य हुआ कि सजल आया था।

सजल बोला, “शाहीन आँटी, मैं अपने पापा को ढूँढ रहा था, कुछ देर पहले मैंने उन्हें यहीं देखा था... मैने सोचा शायद वो अभी यहीं हैं।”

“हाँ वो यहाँ थे तो सही... मेरी वाशिंग मशीन को ठीक कर रहे थे... पर वो कुछ मिनट पहले ही निकले हैं... किसी के साथ गोल्फ खेलने जाना था उन्हें... क्या तुमने उन्हें नहीं देखा?”

“फिर तो मै उन्हें बाद में ही देख पाऊँगा... माफ करना आँटी मैनें आपको बेवजह परेशान किया... धन्यवाद!”

जब सजल वापस जाने के लिये मुड़ा तो शाहीन के दिमाग में एक शैतानी ख्याल आया।

“रुको, सजल... तुम अंदर आकर क्यों नहीं मेरे साथ एक पेप्सी लेते?” कहकर उसने सजल को उसकी बाँह से पकड़कर अंदर खींचा। उसके मन में आया कि कोमल से इससे अच्छा बदला क्या होगा कि उसका पति और बेटा दोनों उसकी गिरफ्त में हों?

सजल ने अपनी पडोसन की मधुरिम काया पर एक भरपूर नज़र दौड़ाते हुए पूछा, “क्या आप सही कह रही हैं?”

“और नहीं तो क्या... आओ अंदर...” शाहीन ने सजल को अंदर खींच लिया और दरवाज़ा बंद कर दिया।

“तुम काफी बड़े हो गये हो, सजल! देखो तो क्या मसल निकल आई हैं... अब तुम वो छोटे बच्चे नहीं रहे जो मेरे घर के सामने साइकल चलाया करते थे।”

सजल के चेहरे पर लाली छा गयी। “हाँ अब मैं छोटा बच्चा नहीं रहा आँटी।”

शाहीन ने खिलखिलाते हुए फ़्रिज से दो पेप्सी निकालीं और एक ग्लास में डाल कर सजल को दी और अपने लिये दूसरे ग्लास में ले कर उसमें थोड़ी व्हिस्की मिला ली। “एक दो साल में तुम अपने पापा के जितने हो जाओगे... तुम उनके जैसे हैंडसम तो हो ही गए हो”

सजल फिर से शर्मा गया। उसकी आँखें शाहीन के जिस्म पर से अब हट नहीं रही थीं। अपनी मम्मी को चोदने के बाद उसे बड़ी उम्र की औरत की सुंदरता का अहसास हो गया था और उसकी ये आँटी सुंदरता में उसकी मम्मी से कहीं भी उन्नीस नहीं थी।

“आओ सोफे पर आराम से बैठते हैं... तुम्हें कहीं जाना तो नहीं है न?”

जब सजल उसके पास आकर बैठ गया तो शाहीन ने उसे वहीं उसी कमरे में चोदने का निश्चय कर लिया।
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